सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष की विचारधाराओं में अंतर हो सकता है, मगर वैमनस्य नहीं होना चाहिए: राष्ट्रपति

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 06, 2022

लखनऊ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के संयुक्त्त सत्र को संबोधित करते हुए यहां सोमवार को कहा कि लोकतंत्र में सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष की विचारधाराओं में अंतर हो सकता है, लेकिन दोनों पक्षों में वैमनस्य नहीं होना चाहिए। कोविंद ने कहा कि प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष का कर्तव्य है। उन्होंने दोनों सदनों के सदस्यों से कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल में सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के बीच गरिमापूर्ण सौहार्द का गौरवशाली इतिहास रहा है। कोविंद ने कहा कि इस समृद्ध परंपरा के विपरीत कभी-कभार जो अमर्यादित घटनाएं हुई हैं, उन्हें अपवाद के रूप में भुलाने का प्रयास करते हुए आप सबको उत्तर प्रदेश की स्वस्थ राजनीतिक परंपरा को और मजबूत बनाना है। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में सत्तापक्ष तथा प्रतिपक्ष की विचारधाराओं में अंतर हो सकता हैं, परंतु दोनों पक्षों में वैमनस्य नहीं होना चाहिए। कोविंद ने जन प्रतिनिधियों से कहा कि प्रदेश की जनता को आप सबसे बहुत उम्मीदें और अपेक्षायें हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही आपका सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है, आपकी जनसेवा के दायरे में सभी नागरिक शामिल हैं, भले ही उन्होंने आपको वोट दिया हो या न दिया हो।’’ राष्ट्रपति ने कहा विश्वास जताते हुए कहा कि आप सबके अथक परिश्रम से उत्तर प्रदेश शीघ्र ही हर तरह से उत्तम प्रदेश बनेगा। उत्तर प्रदेश की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का भारत में पहला स्थान है। इसी प्रकार आम, आलू, गन्ना और दूध के उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। हाल के वर्षों में राज्य में सड़कों के निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख करने के साथ उन्होंने कहा कि रेल तथा वायु संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। इस बात को भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली युवा अन्य राज्यों और विदेशों में आर्थिक प्रगति के प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह विश्वास जगाया है कि निकट भविष्य में ही उत्तर प्रदेश द्वारा आर्थिक प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना तकनीक तथा शहरी विकास की अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। 

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राष्ट्रपति ने कहा किमुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि नीति आयोग की एस. डी. जी. इंडेक्स रिपोर्ट, 2020-21 के तहत, महिलाओं और पुरुषों के बीच वेतन का अंतर देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा उत्तर प्रदेश में सबसे कम है। यह लैंगिक समानता का एक महत्वपूर्ण मानक है और इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश सरकार को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप के तीन महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देशों जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन को मिलाकर जितनी कुल आबादी है, उतनी अकेले उत्तर प्रदेश की है। उत्तर प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व भौगोलिक विविधता यहां के लोकतंत्र को और भी समृद्ध और मजबूत बनाती है। कोविंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की 20 करोड़ से अधिक की आबादी, अनेकता में एकता की हमारी सांस्कृतिक विशेषता का बहुत अच्छा उदाहरण हमारे सामने प्रस्तुत करती है। कोविन्द ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने अभी तक 33 विदेश यात्राएं सम्पन्न करके, उन देशों के साथ भारत के राजनयिक सम्बन्धों को और मजबूत बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जैसी उपजाऊ भूमि तथा कृषि के अनुकूल प्राकृतिक स्थितियां हैं, वे भारत के अन्य प्रदेशों समेत पूरे विश्व में कहीं पर भी नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता पर तथा कृषि आधारित उद्यमों पर और अधिक ध्यान देकर राज्य की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि केंद्र एवं राज्य की सरकारें मिलकर इस दिशा में निरंतर प्रयत्नशील हैं। उन्होंने कहा कि जब देश का सबसे बड़ा राज्य प्रगति के उत्तम मानकों को हासिल करेगा, तो स्वत: ही पूरे देश के विकास को संबल प्राप्त होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज से 25 वर्ष बाद, जब देशवासी आजादी की शताब्दी का उत्सव मना रहे होंगे, तब उत्तर प्रदेश विकास के मानकों पर भारत के अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका होगा और देश विकसित देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा। आजादी की लड़ाई में उत्तर प्रदेश के क्रांतिवीरों की गौरवगाथा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा कि ऐसे क्रांतिवीरों की याद में शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान मालाएं आयोजित की जाएं और अन्य माध्यमों के जरिए उनकी जीवन गाथाओं से लोगों को अवगत कराया जाए। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या 47 है जो कुल 403 सदस्यों का लगभग 12 प्रतिशत है। 100 सदस्यीय विधान परिषद के वर्तमान 91 सदस्यों में महिलाओं की संख्या केवल पांच है, जो लगभग साढ़े पांच प्रतिशत है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि की व्यापक संभावनाएं हैं। ’’ उन्होंने कहा कि इतिहास के हर दौर में उत्तर प्रदेश एक अग्रणी राज्य रहा है। 

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