By अनन्या मिश्रा | Sep 10, 2026
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन, तनाव, अकेलापन, रिश्तों में तनाव और अन्य परिस्थितियां लोगों की मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डाल सकती है। कई बार लोग अपनी परेशानी को किसी से शेयर नहीं कर पाते हैं और खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। इस दौरान परिवार, दोस्तों और समाज आदि की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ-साथ इसकी रोकथाम सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मेंटल हेल्थ को लेकर जागरुकता फैलाने के साथ-साथ लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि मेंटल हेल्थ भी सेहत से जुड़ी समस्या है और इसके लिए मदद लेना एक सामान्य बात है।
हर साल 10 सितंबर 2003 को पहली बार विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया था। इस दिन को मनाए जाने की शुरूआत अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ ने की थी। फिर बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पहल को समर्थन दिया था।
आज के समय में बड़ी संख्या में लोग अकेलेपन, तनाव, डिप्रेशन, आर्थिक दबाव, नौकरी से जुड़ी परेशानियों, पारिवारिक समस्याओं और रिश्तों में दूरियां या तनाव जैसी परिस्थितियों से गुजरते हैं। तो वहीं कई लोग अपनी समस्याओं को दूसरे लोगों से शेयर नहीं कर पाते हैं।
आत्महत्या रोकथाम दिवस का उद्देश्य इस चुप्पी को तोड़ना है। इस दिन लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वह अपनी परेशानियों के बारे में बात करें और जरूरत पड़ने पर परिवार, दोस्तों या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें।
इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य है कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि मेंटल हेल्थ पर बात करना कितना जरूरी है। किसी व्यक्ति की परेशानी को सुनना, समझना और सही समय पर मदद उपलब्ध कराना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
हालांकि यह दिन सिर्फ 10 सितंबर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल मानसिक हेल्थ को लेकर जागरुकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का संदेश देता है।