By डॉ. अनिमेष शर्मा | Aug 29, 2026
आज के समय में कार खरीदते वक्त लोग केवल इंजन, माइलेज या डिजाइन ही नहीं देखते, बल्कि आधुनिक सेफ्टी फीचर्स पर भी खास ध्यान देते हैं। इन्हीं में सबसे चर्चित तकनीक ADAS (Advanced Driver Assistance System) है। यह सिस्टम ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, जितनी तेजी से यह तकनीक लोकप्रिय हो रही है, उतना ही जरूरी है कि इसके काम करने के तरीके और सीमाओं को भी समझा जाए। खासतौर पर भारतीय सड़कों और ट्रैफिक की वास्तविक परिस्थितियों में ADAS हर समय समान प्रदर्शन नहीं कर पाता।
भारत की कई सड़कों पर लेन मार्किंग या तो मिट चुकी होती है या फिर साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में लेन कीप असिस्ट और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर सही तरीके से काम नहीं कर पाते। यदि सिस्टम लेन को पहचानने में असफल हो जाए, तो वह अचानक निष्क्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में वाहन का पूरा नियंत्रण तुरंत ड्राइवर को संभालना पड़ता है।
भारतीय ट्रैफिक दुनिया के सबसे जटिल ट्रैफिक सिस्टम में से एक माना जाता है। सड़क पर अचानक बाइक, ऑटो, साइकिल, पैदल यात्री या जानवर आ जाना आम बात है। कई बार ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) ऐसे हालात में जरूरत से पहले ब्रेक लगा देता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाधा को सही समय पर पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है। इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
तेज बारिश, घना कोहरा, धूल या कीचड़ कैमरा और रडार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि सेंसर सही तरीके से आसपास का वातावरण नहीं देख पाएंगे, तो ADAS फीचर्स अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं या उनकी सटीकता कम हो सकती है। इसलिए खराब मौसम में केवल इस तकनीक पर निर्भर रहना सुरक्षित नहीं माना जाता।
कई लोग यह भूल जाते हैं कि ADAS का प्रदर्शन सेंसर और कैमरों की साफ-सफाई पर भी निर्भर करता है। यदि इन पर धूल, कीचड़ या पानी की परत जम जाए तो सिस्टम गलत अलर्ट दे सकता है या काम करना बंद कर सकता है। नियमित सर्विसिंग और सेंसर की जांच इस तकनीक की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ADAS को कभी भी ऑटो-पायलट या पूरी तरह स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम न समझें। यह केवल ड्राइवर की सहायता करने वाली तकनीक है। ड्राइविंग के दौरान हमेशा दोनों हाथ स्टीयरिंग पर रखें, सड़क पर पूरा ध्यान दें और वाहन की गति परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित रखें। खराब मौसम, भीड़भाड़ वाले इलाके और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतना सबसे बेहतर विकल्प है।
ADAS आधुनिक कारों की सुरक्षा को नई ऊंचाई देता है और दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों में इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएं भी हैं। इसलिए इस तकनीक को ड्राइवर का विकल्प नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सहायक के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे बड़ा आधार आज भी सतर्क और जिम्मेदार चालक ही है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा