Donald Trump का ईरान पर बड़ा दांव: 'मशीनें लेकर जाएंगे और सारा यूरेनियम अमेरिका वापस लाएंगे'

By रेनू तिवारी | Apr 18, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी परमाणु गतिरोध के बीच एक अत्यंत साहसी और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसे अब उनकी 'एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी' के रूप में देखा जा रहा है। एरिजोना में एक सार्वजनिक मंच से ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को सौंपने और उसे अमेरिका ले जाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के अनुसार, वे बड़ी खुदाई मशीनों के साथ ईरान जाकर इस परमाणु सामग्री को सुरक्षित रूप से वापस लाएंगे। हालांकि, यह बयान जितना प्रभावशाली है, उतना ही विवादास्पद भी, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम हस्तांतरण के ऐसे किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप का यह 'बड़ा दांव' एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने सैन्य और आर्थिक तनाव को और गहरा कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि ट्रंप का यह दावा हकीकत है या केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की एक रणनीति।

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पहले दौर की विफलता और बढ़ता विवाद

पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने का मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम पर असहमति थी।

अमेरिकी पक्ष: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कहा कि ईरान का अमेरिकी मांगों को न मानना विफलता का कारण बना।

ईरानी पक्ष: ईरान ने अमेरिका की मांगों को "अनुचित" करार दिया और कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ता तनाव

बातचीत विफल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। ईरान ने इसे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका अपने वादों से पीछे हटता है, तो ईरान "आवश्यक जवाबी कदम" उठाएगा और इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

सोमवार को होने वाली यह संभावित वार्ता वैश्विक तेल आपूर्ति और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस बार भी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

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