हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर ट्रंप ने दी चेतावनी, दिल्ली ने कहा मामला-दर-मामला होगा फैसला

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 07, 2020

नयी दिल्ली।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि व्यक्तिगत अनुरोध के बावजूद अगर उनके देश को मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाई हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात नहीं किया गया तो इसे लेकर जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं मंगलवार को नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पड़ोसियों सहित कई देशों को मामला-दर-मामला के आधार पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात करने का फैसला लिया है और वह कोरोना वायरस महामारी के रोकथाम के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन एक पुरानी और बेहद कम मूल्य की (सस्ती) दवा है जिसका इस्तेमाल मलेरिया के इलाज में होता है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना से जूझ रही दिल्ली के लिए केजरीवाल ने बताई 5 सूत्री योजना

राष्ट्रपति ट्रंप इसे कोरोना वायरस संक्रमण के प्रभावी इलाज के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका में अभी तक वायरस संक्रमण से 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है जबकि 3.6 लाख से ज्यादा लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है कि वह अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए उसके द्वारा ऑर्डर किए गए मात्रा में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट के निर्यात की अनुमति दें।गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान आने के कुछ ही घंटे पहले भारत ने इस दवा के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। चेतावनी भरे लहजे में ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य होगा अगर उनका (प्रधानमंत्री मोदी) यह (दवा निर्यात नहीं करने का) फैसला हुआ। उन्हें मुझे बताना होगा। मैंने रविवार सुबह उनसे फोन पर बात की थी, मैंने कहा था कि अगर आप हमारे लिए निर्यात की अनुमति दें तो अच्छा लगेगा।’’ व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में सोमवार को ट्रंप ने कहा, ‘‘अगर वह निर्यात की अनुमति नहीं देते हैं, तो कोई बात नहीं, लेकिन इसकी जवाबी कार्रवाई भी होगी। और ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?’’

इसे भी पढ़ें: फेसबुक ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए यूजर्स की डिटेल्स शोधकर्ताओं को दी

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब भारत और अमेरिका के साथ-साथ लगभग पूरी दुनिया इस महामारी से जूझ रही है। ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य होगा अगर वह ऐसा करते हैं (दवा निर्यात की अनुमति नहीं देते हैं) क्योंकि भारत और अमेरिका के संबंध काफी अच्छे चल रहे हैं।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान और श्रीलंका, नेपाल आदि पड़ोसी देशों से भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मांग आने के बाद भारत ने मंगलवार को कहा कि वह प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले की समीक्षा कर रहा है। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत का हमेशा से रूख रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दृढ़ एकजुटता और सहयोग करना चाहिए। इसी रुख के कारण हमने कई जगह फंसे दूसरे देशों के नागरिकों को निकला।’’ श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘महामारी के मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि भारत उन सभी पड़ोसी देशों को पेरासिटामोल और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का समुचित मात्रा में निर्यात करेगा जो उसकी क्षमता पर निर्भर हैं।’’

इसे भी पढ़ें: कोरोना वायरस की वजह से जापान में आपातकाल घोषित होने की संभावना

गौरतलब है कि भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर प्रतिबंध इसलिए लगाया है ताकि वह अपनी घरेलू जरुरतों का आकलन कर सके और अपने पास पर्याप्त स्टॉक रख सके। आईसीएमआर ने भारत में मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के माध्यम से कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने की बात कही है। उसने यह दवा ऐसे लोगों को भी देने की सलाह दी है जिनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विदेश विभाग की कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘भारत लंबे समय से दवाओं के क्षेत्र में अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।’’ ट्रंप प्रशासन पहले ही मलेरिया के इलाज में प्रयुक्त होने वाली इस दवा के 2.9 करोड़ डोज का राष्ट्रीय रणनीतिक स्टॉक तैयार कर रखा है। अमेरिका में न्यूयॉर्क के अलावा मिशिगन और टेक्सास में भी कोविड-19 के मरीजों को भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दी जा रही है।

प्रमुख खबरें

Rishabh Pant की Delhi Capitals में वापसी पर AB de Villiers बोले- यह बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं था

Tazmin Brits के शतक का तूफान, South Africa की बड़ी जीत ने बदला Semifinal का पूरा समीकरण

England में Kiwi बल्लेबाजों का कहर, 96 साल पुराना Test Record तोड़ रचा नया इतिहास

FIFA World Cup 2026 में गोलों की बौछार, Lionel Messi की Golden Boot की दावेदारी हुई मजबूत