By प्रज्ञा पांडेय | Mar 14, 2026
पापमोचनी एकादशी के दिन पूजा-पाठ के साथ दान करना भी बेहद पुण्यदायी माना जाता है। पापमोचनी एकादशी पर किए गए दान से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के अटके काम पूरे होने से लेकर उसके भाग्य के द्वार खुलने लगते हैं तो आइए हम आपको पापमोचनी एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजाविधि के बारे में बताते हैं।
पापमोचनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये एकादशी 'पाप' को मोचन यानी (नष्ट) करने वाली एकादशी है। पापमोचनी एकादशी केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को त्यागने का एक अवसर भी है। इस साल पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन कुछ चीजों का दान करना और भी लाभकारी माना गया है। इससे सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करने से दुखों का अंत और जीवन में नई ऊर्जा का आगमन होता है। साथ ही इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण (खोलना) अगले दिन यानी 16 मार्च की सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाएगा।
पंडितों के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, उतनी ही सावधानी इसकी मर्यादाओं को लेकर रखनी चाहिए। अक्सर अनजाने में हम कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना मना है। पौराणिक कथाओं में चावल का संबंध रेंगने वाले जीव से बताया गया है। एकादशी के दिन चावल खाने से चंचलता बढ़ती है और व्रत का सात्विक प्रभाव कम होता है। इस दिन किसी पर क्रोध करने, अपशब्द बोलने या किसी की बुराई करने से बचें, ऐसा करने से संचित पुण्य नष्ट हो जाते हैं। एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित होता है, ऐसे में पूजा के लिए तुलसी एकादशी के एक दिन पहले तोड़कर रख लें। व्रत के दौरान दिन में सोने से बचें. क्योंकि इससे व्रत का प्रभाव कम होता है, इसके बजाय इस समय भगवत गीता का पाठ या मंत्र जाप करें। पापमोचनी एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना भी बेहद शुभ माना जाता है और इससे व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन गुड़ या शक्कर का दान करना भी लाभकारी माना गया है। यह जीवन में मिठास लेकर आता है और विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होने लगती हैं। पापमोचनी एकादशी पर चने की दाल दान करना भी शुभ माना जाता है। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
पापमोचिनी शब्द दो भागों से मिलकर बना है, पाप और मोचिनी अर्थात पापों से मुक्त करने वाली। यह एकादशी उपवास के साथ साथ आंतरिक शुद्धि का साधन भी है। यह दिन आत्मावलोकन और प्रभु की शरण में समर्पण का अवसर प्रदान करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो साधक इस दिन भगवान श्रीहरि की आराधना करता है, पूजा आके दौरान उन्हें तुलसी दल अर्पित करता है, भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करता है और भक्ति भाव से मंत्र-जाप करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि, शांति और धर्म का वास होता है। इस दिन किया गया जप-तप और दान अनंत गुना फल प्रदान करता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार पापमोचिनी एकादशी अपने नाम के अनुरूप फल प्रदान करने वाली है। ऐसे में साधक को अपने जाने-अनजाने किए गये पापों से मुक्ति और सुख-सौभाग्य को पाने के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करना चाहिए। जो व्यक्ति पूरी निष्ठा और नियम के साथ इस व्रत को करता है, उस पर पूरे साल भगवान विष्णु की कृपा बरसती है, जिसके चलते वह सभी प्रकार के रोग-शोक और पाप से मुक्त रहता है। पापमोचिनी एकादशी व्रत के पुण्यफल से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि घोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या से देवलोक विचलित हो उठा। देवराज इंद्र ने अप्सरा मंजुघोषा को उनकी तपस्या भंग करने भेजा। मोह के प्रभाव में आकर ऋषि की साधना भंग हो गई और वे वर्षों तक सांसारिक आकर्षण में उलझे रहे। जब उन्हें अपनी भूल का बोध हुआ, तो वे अत्यंत दुखी हुए और पापों से मुक्ति का उपाय खोजने लगे। तब देवर्षि नारद ने उन्हें पापमोचिनी एकादशी व्रत का रखने का सुझाव दिया। विधिपूर्वक व्रत रखने तथा भगवान नारायण की आराधना से मेधावी ऋषि पुनः तपोबल प्राप्त कर पापों से मुक्त हुए।
पंडितों के अनुसार पापमोचिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि की रात्रि से ही प्रारंभ करना चाहिए। प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल को साफ करें और उसमें भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीप, धूप, पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत से पूजन करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें। रात्रि में भजन-कीर्तन एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। द्वादशी को प्रातः ब्राह्मण या निर्धन व्यक्ति को भोजन कराकर व्रत का पारण करें। व्रत के साथ मन, वचन और कर्म को पवित्र रखें।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी व्रत वाले दिन यदि कोई व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा के साथ तुलसी जी की विशेष पूजा करता है या फिर तुलसी का पौधा लगाकर उसकी प्रतिदिन सेवा करता है या फिर तुलसी के पौधे का दान करता है तो उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. पापमोचिनी एकादशी व्रत करने वाले साधक को यदि संभव हो तो इस पावन तिथि पर श्री हरि के मंदिर में जाकर उनका विशेष रूप से दर्शन और पूजन करना चाहिए। भगवान के सम्मुख अपने दोषों को स्वीकार कर क्षमा मांगें। तुलसी को जल अर्पित कर परिक्रमा करें। विष्णु सहस्रनाम या हरिनाम संकीर्तन करें। सत्य, करुणा और संयम का पालन करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
- प्रज्ञा पाण्डेय