By अभिनय आकाश | Oct 15, 2026
दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत में कॉलर की पहचान से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत, 1 नवंबर 2026 से कॉलर की पहचान में उसका नाम भी शामिल किया जा सकेगा, जो टेलीकॉम ऑपरेटरों के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज है। यह बदलाव 'यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट' में संशोधन के जरिए किया गया है, जिससे 'कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन' (CLI) की परिभाषा अपडेट हो गई है। नई परिभाषा के अनुसार, कॉलर की पहचान में टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर द्वारा दिया गया टेलीफोन आइडेंटिफायर, उनके रिकॉर्ड में दर्ज सब्सक्राइबर का नाम, या लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी द्वारा तय की गई कोई अन्य पहचान शामिल हो सकती है। इससे पहले, इस परिभाषा में मुख्य रूप से टेलीफोन नंबर, IP एड्रेस या लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके के जरिए सब्सक्राइबर की पहचान शामिल थी।