By Ankit Jaiswal | Jun 02, 2026
वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को लगातार दूसरा झटका लगा है। पहले ताइवान ने भारत को पीछे छोड़कर पांचवां स्थान हासिल किया था और अब दक्षिण कोरिया भी भारत से आगे निकल गया। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में इस वर्ष करीब 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उछाल में देश की प्रमुख तकनीकी कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स की बड़ी भूमिका रही है। दोनों कंपनियां एआई आधारित मेमोरी चिप तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती हैं। हाल ही में इन दोनों कंपनियों का मूल्यांकन 1 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार कर गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई की वैश्विक मांग बढ़ने से चिप निर्माण कंपनियों को बड़ा लाभ मिला है। इसी वजह से दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक इस वर्ष 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने इस दौरान कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे बड़े बाजारों को भी पीछे छोड़ दिया है।
एसेट वैल्यू इन्वेस्टर्स के वरिष्ठ निवेश विश्लेषक रॉस मैकगैरी के अनुसार दक्षिण कोरिया का भारत के बराबर पहुंचना और फिर आगे निकलना एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में आई इस तेजी का बड़ा हिस्सा चिप उद्योग पर आधारित है। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या व्यापक स्तर पर कॉरपोरेट सुधार और आर्थिक मजबूती इस तेजी को बनाए रख पाती है या नहीं।
दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार को हाल के महीनों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। रुपये में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और एआई से सीधे जुड़ी बड़ी कंपनियों की सीमित मौजूदगी ने बाजार पर दबाव बनाया है। यही वजह है कि भारत की रैंकिंग में गिरावट देखने को मिली है।
हालांकि शेयर बाजार के आकार में पीछे होने के बावजूद भारत आर्थिक मोर्चे पर दक्षिण कोरिया से काफी आगे बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमान के अनुसार भारत का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 4.15 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 1.93 लाख करोड़ डॉलर है। इसके अलावा भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल है।
बता दें कि पिछले सप्ताह ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया था। ताइवान की बढ़त का मुख्य कारण ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की जबरदस्त तेजी रही है। यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी अनुबंध आधारित चिप निर्माता कंपनी मानी जाती है और अकेले ताइवान के प्रमुख सूचकांक में इसकी हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है।
कुल मिलाकर एआई और एडवांस चिप निर्माण उद्योग ने ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। वहीं भारत के सामने अब निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और बाजार को नई गति देने की चुनौती मौजूद हैं।