By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 04, 2026
नयी दिल्ली, चार नवंबर एयरलाइन कंपनियों को जल्द ही टिकाऊ विमान ईंधन (एसएएफ) का मिश्रण अनिवार्य रूप से शुरू करना होगा। इसकी शुरुआत 2027 से एक प्रतिशत मिश्रण के साथ होगी। टिकाऊ विमान ईंधन पर जारी राष्ट्रीय नीति के मसौदे में यह कहा गया है।
एसएएफ के उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए जीएसटी में छूट या कटौती सहित कर संबंधी सहायता, परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिए वित्तपोषण, हरित वित्तपोषण के साधन और तेलशोधन कारखानों में जरूरी बदलाव के लिए सहायता जैसे उपायों पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, ईंधन मिश्रण की व्यवस्था दो चरणों में लागू की जाएगी। पहले चरण में 2027 से 2030 तक एसएएफ का मिश्रण एक प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाएगा।
दूसरे चरण में 2031 से 2040 तक इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार की शुरुआती पूंजी के लिए अलग से एसएएफ नवाचार कोष स्थापित करने की योजना है। इसके जरिये प्रायोगिक परियोजनाओं, स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास, कच्चे माल के बेहतर उपयोग, ईंधन के पूरे जीवनचक्र के आकलन और उन्नत एसएएफ तकनीक पर काम कर रहे नये उद्यमों तथा प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं को सहायता दी जाएगी।
मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि संबंधित मंत्रालय और विभाग उपयुक्त समझे जाने पर जीएसटी में छूट या कटौती, आयात शुल्क में छूट और आयकर अवकाश पर विचार कर सकते हैं। नीति के मसौदे के अनुमान के अनुसार, भारत में एटीएफ की सालाना खपत मौजूदा 82 लाख टन से बढ़कर 2030 तक करीब 1.42 करोड़ टन हो जाएगी। देश में 2040 तक सालाना करीब एक करोड़ टन एसएएफ उत्पादन की क्षमता है।
इसके लिए 70-85 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। एसएएफ के उत्पादन में कृषि अवशेष, इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल, नगरपालिका का ठोस कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट और गैर-जैविक स्रोतों से प्राप्त नवीकरणीय ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है। मसौदा नीति में कहा गया है कि विमानन क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में एसएएफ का बड़े पैमाने पर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रमाणपत्र व्यवस्था, उत्पादन से आपूर्ति तक निगरानी प्रणाली, परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिए वित्तपोषण, हरित वित्तपोषण के साधन, तेलशोधक कारखानों में जरूरी बदलाव के लिए सहायता और हवाई अड्डों पर आवश्यक बुनियादी ढांचे की तैयारी सहित एक व्यापक परिवेश विकसित करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, टिकाऊ विमानन ईंधन पर राष्ट्रीय परिषद (एनसी-एसएएफ) गठित करने का प्रस्ताव है। यह देश में एसएएफ नीति को समन्वित, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में काम करेगी। एसएएफ ऐसा ईंधन है, जिसे मौजूदा विमान ईंधन के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके लिए विमानों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं होती।