Prabhasakshi NewsRoom: Diwali से पहले DRDO ने टेस्ट किया सबसे बड़ा पटाखा, Pralay Missile के सफल परीक्षण ने उड़ाए दुश्मनों के होश

By नीरज कुमार दुबे | Nov 06, 2026

दिवाली से पहले भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ऐसा पटाखा टेस्ट किया है, जिसकी आवाज दुश्मन देशों तक पहुंच गई है। यह पटाखा कोई आम आतिशबाजी नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी प्रलय मिसाइल है। 5 नवंबर को ओडिशा तट के पास इस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। खास बात यह है कि यह परीक्षण केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारतीय सेना में प्रलय मिसाइल को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। देखा जाये तो भारत अब ऐसी मिसाइलों का जखीरा तैयार कर रहा है, जो युद्ध की स्थिति में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, कमांड सेंटर और हथियारों के भंडार को निशाना बनाने की क्षमता रखती हैं।

प्रलय मिसाइल क्यों है इतनी खतरनाक?

हम आपको बता दें कि प्रलय एक स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर तक है। यह पारंपरिक विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम है और अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों के हिसाब से इसके पेलोड में बदलाव किया जा सकता है। इसकी पेलोड क्षमता लगभग 350 से 1,000 किलोग्राम तक बताई जाती है।

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी उड़ान का तरीका है। सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक निश्चित घुमावदार रास्ते पर चलती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए उनकी दिशा का अनुमान लगाना अपेक्षाकृत आसान होता है। लेकिन प्रलय उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है और जरूरत के मुताबिक दिशा में बदलाव कर सकती है। यही वजह है कि इसे इंटरसेप्ट करना दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है, जिससे इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना और तेजी से तैनात करना आसान होता है।

साथ ही इसका परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शुरुआती विकास परीक्षण नहीं, बल्कि सेना की जरूरतों के मुताबिक किए जा रहे यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का हिस्सा था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरे हुए। DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर इसे विकसित किया है, जबकि भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने इसका उत्पादन किया है। रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस सफल परीक्षण के बाद मिसाइल को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया अब बेहद करीब है। इसका अर्थ है कि भारत अब केवल मिसाइल विकसित करने के चरण में नहीं है, बल्कि उसे वास्तविक सैन्य इस्तेमाल के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

पाकिस्तान और चीन के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती?

हम आपको यह भी बता दें कि प्रलय की तैनाती से भारत की पारंपरिक मिसाइल मारक क्षमता में बड़ा बदलाव आ सकता है। पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की स्थिति में यह मिसाइल सीमा के भीतर स्थित एयरबेस, सैन्य ठिकानों, हथियारों के डिपो, रडार प्रतिष्ठानों और कमांड सेंटर को निशाना बनाने का महत्वपूर्ण हथियार बन सकती है। इसकी 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को इसकी जद में ला सकती है।

साथ ही चीन के संदर्भ में भी इसका महत्व कम नहीं है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीन ने जिस तरह सैन्य ढांचे, एयरबेस और मिसाइल प्रणालियों का विस्तार किया है, उसे देखते हुए प्रलय जैसी मोबाइल और सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइल भारत को सामरिक बढ़त दे सकती है। इसकी खासियत यह है कि इसे परमाणु हथियार के बजाय पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है। यानी सीमित युद्ध की स्थिति में भी भारत के पास दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने का एक प्रभावी विकल्प होगा।

DRDO के दूसरे परीक्षण भी बदल रहे हैं भारत की ताकत

इसके अलावा, प्रलय का यह परीक्षण अचानक सामने आई कोई अकेली उपलब्धि नहीं है। DRDO पिछले कुछ समय से मिसाइल तकनीक के कई मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। जुलाई 2025 में प्रलय के दो लगातार उड़ान परीक्षण किए गए थे। इन परीक्षणों में मिसाइल की न्यूनतम और अधिकतम दूरी तक मार करने की क्षमता को परखा गया था। दिसंबर 2025 में इसका सैल्वो परीक्षण भी किया गया, जिसमें एक ही लॉन्चर से लगातार दो मिसाइलें दागी गई थीं। इससे युद्ध के मैदान में कम समय के भीतर कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ। साथ ही मई 2026 में DRDO ने एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था। हम आपको बता दें कि MIRV का मतलब है एक ही मिसाइल से अलग-अलग लक्ष्यों पर कई परमाणु वारहेड पहुंचाने की क्षमता। इस परीक्षण ने भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती दी।

साथ ही आने वाले समय में DRDO के सामने प्रलय को सेना में शामिल कराने, इसके उत्पादन को बढ़ाने और मिसाइल की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने की चुनौती है। इसके अलावा अग्नि, हाइपरसोनिक हथियारों, एयर डिफेंस और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों पर चल रहे कार्यक्रम भी भारत की भविष्य की सैन्य तैयारी का हिस्सा हैं।

बहरहाल, प्रलय की सफलता भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। भारत अब केवल दुश्मन के हमले को रोकने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को सटीकता से तबाह करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। पिनाका जैसे रॉकेट सिस्टम से लेकर प्रलय और अग्नि जैसी मिसाइलों तक DRDO की उपलब्धियां बता रही हैं कि भारतीय सैन्य शक्ति का स्वदेशीकरण अब निर्णायक दौर में पहुंच रहा है। दिवाली से पहले प्रलय का सफल परीक्षण इसी बदलती सैन्य ताकत का सबसे नया और धमाकेदार उदाहरण है।

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