भारत आ रहे जहाज पर ड्रोन से हमला, इंजन रूम में आग, फिर ट्रंप ने...

By अभिनय आकाश | Jul 08, 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग पर भी एक बार फिर से साफ दिखाई देने लगा है। इसी बीच कतर से भारत के लिए रवाना हुए एलएनजी से लदे एक विशाल जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। इस घटना ने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल गैस के कारोबार को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी है। एलएनजीसी अल रकायट नाम का एलएनजी जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से गुजरात की ओर रवाना हो रहा था। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पहुंचा तभी उस पर संदिग्ध ड्रोन हमला किया गया। 

इसे भी पढ़ें: 80+टारगेट, 4-5 गुना बड़ा हमला, ईरान-US के बीच फिर शुरू हुई जंग!

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कतर की ओर से ईरान पर संदेह जताई जाने की बात कही गई है जबकि ईरान ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है। फिलहाल हमले के पीछे की वास्तविक वजह और हमलावरों की पहचान को लेकर जांच जारी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। जानकार मानते हैं कि ऐसे हमलों का उद्देश्य किसी एक जहाज को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग पर दबाव बनाना भी हो सकता है। होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक पांचवा हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलएनजी की आपूर्ति होती है। कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देशों का अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। अगर होरमुज में तनाव लगातार बढ़ता है या जहाजों पर हमलों की घटनाएं जारी रहती हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और आयात लागत बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है। 

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है। जहाज पर हुए हमले की जांच जारी है और विभिन्न देशों की नौसेनाएं क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किस दिशा में जाता है और क्या दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग पर हालात सामान्य हो पाते हैं या नहीं। ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से तनाव तेज हो गया है और युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। स्टेट ऑफ होरमुज में तीन तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीने में हुआ सीजफायर टूटने की कगार पर पहुंच गया है। इस हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर बड़ा हमला बोल दिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की दी गई ढील को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल देखा गया है। आपको बता दें कि यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई को सुपुर्दे खाक करने से पहले उनका जनाजा देश की जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा जा रहा है। 

प्रमुख खबरें

Rishikesh में Jagga समेत गिरोह के 3 सदस्य गिरफ्तार, जबरन वसूली का था आरोप

IND vs SL: टीम इंडिया को बड़ा झटका, Kuldeep Yadav बाहर, सारांश जैन का 33 की उम्र में ऐतिहासिक Test Debut

BJP प्रमुख Nitin Nabin ने की बैठक, सात राज्यों के चुनाव पर बनी रणनीति

Nishant Kumar बनेंगे बिहार के अगले CM, JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने जताई उम्मीद