Gold Prices में गिरावट: US Inflation और Interest Rates के संकेतों ने बढ़ाई निवेशकों की धड़कन

By Ankit Jaiswal | Aug 13, 2026

सोने की कीमतों में गुरुवार को थोड़ी नरमी देखने को मिली है। अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। सुबह 9 बजकर 22 मिनट के आसपास अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.4 प्रतिशत गिरकर 4,393.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सोने का वायदा भाव भी 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,451.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

गुरुवार को जारी एक अन्य आंकड़े में जुलाई के दौरान उत्पादक कीमतों में महीने-दर-महीने कोई बदलाव नहीं होने की जानकारी सामने आई। इन आंकड़ों से यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी करने से बच सकता है।

गौरतलब है कि बाजार में सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना अब करीब 36 प्रतिशत मानी जा रही है। उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े आने से पहले यह संभावना करीब 46 प्रतिशत थी। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने जुलाई की बैठक में ब्याज दर को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखा था। हालांकि, तीन अधिकारियों ने दर बढ़ाने के पक्ष में अपनी असहमति जताई थी।

अब निवेशकों की नजर इस महीने के अंत में होने वाली जैक्सन होल बैठक पर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष केविन वार्श के बयान से आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर दिशा का कुछ संकेत मिलने की उम्मीद है। ब्याज दरें ज्यादा रहने पर सोने पर दबाव आ सकता है, क्योंकि सोना निवेशकों को ब्याज के रूप में कोई आय नहीं देता है।

अमेरिकन हार्टफोर्ड गोल्ड के अध्यक्ष मैक्स बेकर के मुताबिक, केंद्रीय बैंक की ओर से भविष्य की नीतियों को लेकर कम स्पष्ट संकेत दिए जाने से बाजार के लिए अनुमान लगाना मुश्किल होगा। ऐसे में सोने की कीमतें हर नए आर्थिक आंकड़े पर तेजी से प्रतिक्रिया कर सकती हैं।

दूसरी ओर, मध्य पूर्व की स्थिति भी सोने के लिए अहम बनी हुई है। संघर्ष खत्म करने और होरमुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में अभी तत्काल सफलता के संकेत नहीं हैं। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर यातायात संबंधी पाबंदियां बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी का रुख है, जिसका असर महंगाई और ब्याज दरों के जरिए सोने पर पड़ सकता है।

बता दें कि अमेरिकी डॉलर में हल्की कमजोरी ने सोने की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को सहारा मिल सकता है।

इसके अलावा, चीन समेत कई केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच सोने की मांग का आधार व्यापक हो रहा है। हालांकि ब्याज दरें, वैश्विक तनाव और बाजार की गति आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं।

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