उत्तराखंड की धरती से PM मोदी का पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला, बोले- विकास परियोजनाओं को 4 दशक तक लटकाया

By अनुराग गुप्ता | Dec 30, 2021

हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में 17,500 करोड़ रुपए की 23 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये सभी परियोजनाएं कुमाऊं के सभी साथियों को बेहतर कनेक्टिविटी और बेहतर सुविधाएं देने वाले हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज कुमाऊं आने का सौभाग्य मिला तो कई पुरानी यादें ताज़ा हो गईं हैं। ये इतनी आत्मीयता से आपने जो उत्तराखंडी टोपी मुझे पहनाई गई है, वो उसे पहनकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैं हल्द्वानीवालों के लिए एक और सौगात लेकर आया हूं। ​हल्द्वानी शहर के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए हम लगभग 2,000 करोड़ रुपए की योजना लेकर आ रहे हैं। अब हल्द्वानी में पानी, सीवरेज, सड़क, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट सभी जगह पर अभूतपूर्व सुधार होगा। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम हिमाचल की ताकत को जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उत्तराखंड से कितनी ही नदियां निकलती हैं। आजादी के बाद से ही, यहां के लोगों ने दो धाराएं और देखी हैं। एक धारा है- पहाड़ को विकास से वंचित रखने की और दूसरी धारा है- पहाड़ के विकास के लिए दिन रात एक कर देने की। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ तेज गति से देश को नई ऊंचाई पर ले जाने में जुटी है। आज उधमसिंह नगर जिले में एम्स ऋषिकेश के सेटेलाइट केंद्र और पिथौरागढ़ में जगजीवन राम सरकारी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी गई है।

उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड के इस कार्यक्रम में करीब 9,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सड़क निर्माण से जुड़े हैं। पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत 1,200 किमी ग्रामीण सड़क बनाने का काम भी शुरू हुआ है। इन सड़कों के अलावा उत्तराखंड में 151 पुलों का निर्माण भी किया जाएगा। 

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इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले सरकार में रहने वाले लोगों को आपकी चिंता होती तो क्या यह परियोजनाएं चार दशक तक लटकती क्या ? अगर उनका आपके प्रति प्यार था तो क्या काम की यह दुर्दशा होती क्या ? सच्चाई यही है कि पहले जो सरकार में थे उन्होंने उत्तराखंड के सामर्थ्य की कभी परवाह नहीं की। परिणाम यह हुआ कि हमें पर्याप्त बिजली नहीं मिली, किसानों के खेतों को सिंचाई नहीं मिली और देश के अधिकतर ग्रामीणों को पानी के अभाव में जीवन गुजरना पड़ा।

यहां सुने पूरा संबोधन:-  

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