By अभिनय आकाश | Sep 14, 2026
पश्चिमी देशों और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच रूस ने बर्फीले आर्कटिक के सीने को चीर कर एक ऐसा तेल का खजाना खोल दिया है जिसने दुनिया के ऊर्जा समीकरण को हिला कर रख दिया। राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन भारत हैं। लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने साइबेरिया के सबसे बड़े बोस्तोक ऑयल प्रोजेक्ट से कच्चे तेल की पहली खेप को हरी झंडी दिखा दी है। अब यह खबर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलने जा रहा है। जमीन के नीचे दबा 700 करोड़ टन तेल का महाभंडार और भारत के लिए स्टेट ऑफ हॉर्मोज के संकट से हमेशा के लिए आजादी का रास्ता। रूस के उत्तरी साइबेरिया स्थित तैमीर प्रायद्वीप में शुरू हुआ वोक ऑयल प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। अब इसका पहला पॉइंट है विशाल भंडार।
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल हॉर्मूज के संकरित समुद्री रास्ते से मंगाता है। जनवरी फरवरी 2026 के आंकड़े के मुताबिक इस रास्ते से भारत रोजाना करीब 26 लाख बैरल तेल आयात कर रहा था जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता है। लेकिन यह रास्ता हमेशा से बारूद के ढेर पर रहता है। अमेरिका, ईरान का तनाव ही देख लीजिए। खाड़ी में सैन्य तनाव, प्रतिबंध और टैंकरों पर हमलों के खतरे लगातार बने रहे हैं। दूसरा पॉइंट है इसका सप्लाई चेन का चोक पॉइंट। अगर हरमूज में कोई भी रुकावट आती है तो भारत में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वह देखा भी हमने है। यहीं पर पुतिन का वो स्टोक प्रोजेक्ट भारत के लिए गेम चेंजर साबित हुआ।
वो स्टोक प्रोजेक्ट से निकलने वाला तेल 790 कि.मी. लंबी पाइपलाइन के जरिए कारा सागर के बुक सेवेवर टर्मिनल तक पहुंचेगा। वहां से बड़े ऑयल टैंकरों के जरिए इसे सीधे भारत और अन्य देशों में भेजा जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है। फायदा यह है रूस से आने वाले इन जहाजों और की संकरी खाड़ी से गुजरने की कोई जरूरत नहीं होगी। यह एक पूरी तरह स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री मार्ग है। जानकारों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरी क्षमता से शुरू होने के बाद भारत की हॉर्मू पर निर्भरता घटकर लगभग आधी रह सकती है। यह केवल खरीदार और विक्रेता का हिस्सा नहीं है। भारत इस प्रोजेक्ट में एक अहम साझेदार है। चलिए अब जान लेते हैं भारत की 49.9% हिस्सेदारी और आर्थिक फायदे।