By अंकित सिंह | Oct 10, 2026
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया कि वे 'फॉर्म-7' आवेदनों की संख्या पर सख्त सीमाएं लगाएं। इन आवेदनों का इस्तेमाल कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल नामों या शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित नामों पर आपत्ति जताने के लिए करता है। यह कदम तब उठाया गया है जब बार-बार ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें वोटर बिना किसी ठोस आधार के कई आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। आयोग के अनुसार, ऐसी हरकतों से उन असली वोटरों को परेशानी हुई है जिनके नामों पर आपत्ति जताई गई थी, और साथ ही फील्ड लेवल पर चुनाव अधिकारियों का प्रशासनिक काम भी बढ़ गया है।
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के दौरान, BLA ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट पब्लिश होने से पहले हर दिन 50 तक और उसके बाद हर दिन 10 फ़ॉर्म जमा कर सकते हैं। वोटर लिस्ट पर मौजूदा मैनुअल, 2023 में व्यक्तियों द्वारा एक साथ कई फ़ॉर्म जमा करने पर रोक थी और EROs के लिए यह ज़रूरी था कि वे मामलों की क्रॉस-वेरिफ़िकेशन करें, जब कोई वोटर पाँच से ज़्यादा नामों पर आपत्ति जताए। हालाँकि, ऑफ़लाइन फ़ॉर्म जमा करने की सीमा EROs की मर्ज़ी पर निर्भर थी, जिससे प्रशासनिक उलझन पैदा हुई।
नए निर्देशों के तहत, ECI ने ऑनलाइन और ऑफलाइन जमा किए जाने वाले Form-7 आवेदनों के लिए अलग-अलग सीमाएं तय की हैं। दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान, कोई भी वोटर पूरी अवधि में ज़्यादा से ज़्यादा 10 Form-7 आवेदन जमा कर सकता है। लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया (Continuous Updation) के दौरान, हर वोटर के लिए सीमा हर महीने पांच आवेदन की होगी।