भारत में लगातार हो रही पत्थरबाजी से कहीं आर्थिक विकास प्रभावित न होने लगे

By प्रहलाद सबनानी | Jun 15, 2022

अभी हाल ही में अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने भारतीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण (आउटलुक) में सुधार (अपग्रेड) किया है। फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन रेटिंग के आउटलुक को “नकारात्मक” श्रेणी से अपग्रेड कर “स्थिर” श्रेणी में ला दिया है। भारत की सावरन रेटिंग में यह सुधार देश में तेजी से हो रहे आर्थिक सुधारों के कारण मध्यम अवधि के दौरान भारत की विकास दर में गिरावट की जोखिम के कम हो जाने के चलते किया गया है। भारत में आर्थिक मोर्चे पर इस तरह की बहुत सी अच्छी खबरों यथा पूरे विश्व में सबसे तेज गति से आर्थिक विकास करने वाली अर्थव्यवस्था, विदेशी व्यापार में तेज वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मा, मोबाइल फोन उत्पादन, ऊर्जा, औटोमोबील, यूनिकोन की संख्या में वृद्धि, आदि क्षेत्रों में पूरे विश्व में नायक्तव की भूमिका निभाने की स्थिति प्राप्त करना, आदि, को कई देश प्रतिस्पर्धता के चलते पचा नहीं पा रहे हैं। भारत द्वारा की जा रही तेज आर्थिक विकास दर एवं विदेशी व्यापार के क्षेत्र में हो रहे सुधार के चलते भारत की साख वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। एशिया क्षेत्र से चीन, जापान के बाद भारत भी तेजी से एक आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है, जिसे विश्व के कई अन्य देश वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक ताकत में कमी के रूप में देख रहे हैं। इसलिए भारत के आर्थिक विकास में कई प्रकार की बाधाएं खड़ी करने के प्रयास कुछ देशों द्वारा किए जा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: दुनिया में सबसे तेजी से दौड़ रही इंडियन इकोनॉमी, अमेरिका-चीन को भी पछाड़ा, पढ़ें भारतीय अर्थव्यवस्था का 'आर्थिक विश्लेषण'

किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास को गति देने के लिए देश में लगातार शांति बनाए रखना जरूरी माना जाता है। परंतु, चूंकि भारत आज पूरे विश्व में सबसे तेज गति से आर्थिक विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है, अतः भारत में अशांति फैलाने में कुछ देश संलग्न दिखाई दे रहे हैं। अभी हाल ही में दरअसल कुछ विकसित देशों के उकसावे में आकर कुछ अरब देशों यथा कतर, ओमान, सऊदी अरब एवं ईरान आदि ने भारत में हाल ही में एक टीवी चैनल पर एक बहस के दौरान एक भारतीय महिला द्वारा की गई एक टिप्पणी को लेकर इन देशों ने भारत से जवाब मांगा है। इस टिप्पणी को लेकर ही भारत के मुस्लिम समाज के अनुयायियों ने कई शहरों में पत्थरबाजी की है एवं सरकारी एवं व्यक्तिगत सम्पत्तियों को बहुत नुक्सान पहुंचाने का प्रयास किया है। पूरे विश्व में आज भारत ही एक ऐसा देश है जहां इस देश के नागरिक आसानी से राष्ट्रीय एवं व्यक्तिगत संपतियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं एवं पोलिस एवं जनता पर पत्थर फैंक सकते हैं। कई देश इस तरह की गतिविधियों को भारत में फैलाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भारत में शांति भंग हो एवं देश का आर्थिक विकास प्रभावित हो। 

चीन, जापान, इजराईल एवं कई यूरोपीयन देशों में किसी भी नागरिक द्वारा पत्थरबाजी एवं सरकारी अथवा व्यक्तिगत संपतियों को नुक्सान पहुचाने पर कड़े कानून लागू किए गए हैं अतः इन देशों में इस प्रकार की गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। परंतु, भारत में बोलने की आजादी एवं प्रदर्शन करने की आजादी के चलते इस तरह की गतिविधियां हाल ही के समय में बहुत बढ़ी हैं। इससे भारत के आर्थिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ने की सम्भावनाएं बढ़ रही हैं।

भारत में मुस्लिम समाज को अब इस बात पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए कि देश के आर्थिक विकास में वे अपना योगदान किस प्रकार बनाए रखना चाहते हैं। यदि देश के आर्थिक विकास पर किसी भी प्रकार की आंच आती है तो इससे मुस्लिम समाज को ही सबसे अधिक नुक्सान होने वाला है। क्योंकि, आर्थिक विकास में कमी होने से गरीबी रेखा के आसपास जीवन यापन कर रहे लोगों पर बहुत अधिक विपरीत प्रभाव पड़ता है। अतः राष्ट्रवादी मुस्लिम समाज को अब आगे आकर अपनी भूमिका का निर्वहन करने की आवश्यकता है ताकि वे अपने समाज के लोगों को इस तरह की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु प्रेरित कर  सकें। ऐसा बताया जा रहा है कि कतर में उक्त कारण से कुछ भारतीयों द्वारा किए गए प्रदर्शन पर वहां की सरकार ने इन भारतीयों को कतर से बाहर निकालने का निर्णय लिया है। चीन में तो मुस्लिम समाज के लोग किसी भी प्रकार का प्रदर्शन आदि कर ही नहीं सकते बल्कि चीन में तो मुस्लिम समाज पर कई प्रकार के अत्याचार किए जा रहे हैं। इसी प्रकार बताया जा रहा है कि अभी हाल ही में सूडान ने अपने देश में इस्लाम के अनुपालन पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। जापान ने भी इस्लाम धर्म का पालन करने वाले लोगों के लिए कड़े कानून लागू कर दिए हैं। एक समाचार के अनुसार नार्वे ने एक बड़ी संख्या में इस्लाम मजहब को मानने वाले लोगों को अपने देश से निकाल दिया है, इस कदम को उठाने के बाद नार्वे में अपराध की दर में 72 प्रतिशत तक की कमी आ गई है एवं वहां की जेलें 50 प्रतिशत तक खाली हो गई हैं तथा पोलिस अब नार्वे के मूल नागरिकों के हितों के कार्यों में अपने आप को व्यस्त कर पा रही है। विश्व के कई अन्य देशों ने भी इसी प्रकार के कठोर निर्णय लिए हैं। भारत को भी अब देश हित में पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने हेतु एवं सरकारी सम्पत्ति एवं व्यक्तिगत सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाने से रोकने हेतु कुछ कड़े नियमों को लागू किए पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर सरकार को और ध्यान देना होगा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदली हुई परिस्थितियों में सभी देश भारत के साथ व्यापार को बढ़ावा देना चाह रहे हैं। आज भारत के प्रथम पांच विदेशी व्यापार करने वाले देशों में तीन इस्लाम मजहब को मानने वाले राष्ट्र हैं। अमेरिका एवं चीन के बाद आज भारत से सबसे अधिक विदेशी व्यापार करने वाले देशों में यूनाइटेड अरब अमीरात, सऊदी अरब एवं ईराक हैं। भारतीय मुस्लिम समाज के नागरिकों को इस बात पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए कि जब विश्व के अन्य इस्लाम मजहब को मानने वाले देश भारत के साथ अपने विदेशी व्यापार को लगातार बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं एवं भारत के साथ विशेष मुक्त व्यापार समझौते कर रहे हैं ऐसे में भारत में अस्थिरिता फैलाने में वे अपना योगदान कैसे दे रहे हैं इससे हो सकता है कि भारत की आर्थिक प्रगति विपरीत से प्रभावित होने लगे। इसलिए राष्ट्र हित में अब भारत के मुस्लिम समुदाय को पत्थर फैंकने एवं सरकारी सम्पत्ति और व्यक्तिगत संपत्ति को नुक्सान पहुंचाने जैसे कार्यों से अपने आप को बचाना चाहिए। कहीं भारतीय मुस्लिम समाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत विरोधी षड्यंत्र का जाने-अनजाने में हिस्सा तो नहीं बन रहे हैं।    

- प्रहलाद सबनानी 

सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक 

के-8, चेतकपुरी कालोनी, झांसी रोड, लश्कर, ग्वालियर- 474 009

प्रमुख खबरें

Bakrid से पहले CM Yogi के UP में सख्त निर्देश: खुले में न नमाज़, न कुर्बानी

IPL 2026 Playoff Schedule: RCB, GT, SRH, RR तैयार, खिताब की जंग शुरू

देश व समाज हित में डीजल व पेट्रोल की बचत के साथ-साथ स्थाई सादगी समय की मांग!

Top 10 Breaking News 25 May 2026 | Assam Assembly Uniform Civil Code Bill | Twisha Sharma Death Case | आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ें