By एकता | May 26, 2026
ईद-उल-अजहा, जिसे हम सब बकरीद के नाम से जानते हैं, इस्लाम धर्म का एक बेहद पाक और बड़ा त्योहार है। पहले इस त्योहार के 27 मई को मनाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन चांद नजर न आने के कारण अब इस साल यह 28 मई को मनाया जाएगा। यह त्योहार हजरत इब्राहिम की याद में मनाया जाता है, जो खुदा के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। इसी याद में मुसलमान बकरीद पर बकरे की कुर्बानी देते हैं। हालांकि, सही बकरा चुनने से लेकर कुर्बानी करने तक के कुछ खास नियम हैं, जिनका पालन करना हर मुसलमान का फर्ज है।
जब भी आप कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने जाएं तो उसकी उम्र पर सबसे ज्यादा ध्यान दें। इस्लामिक नियमों के अनुसार, कुर्बानी के बकरे की उम्र कम से कम एक साल की होनी चाहिए। एक साल की उम्र होने से यह पक्का हो जाता है कि बकरा पूरी तरह सेहतमंद है और उसका वजन भी सही है। अगर बकरा एक साल से छोटा है तो उसकी कुर्बानी नहीं दी जा सकती।
आजकल बाजार में बकरों की कई ऐसी खास ब्रीड्स मौजूद हैं, जो अपनी अच्छी सेहत और भारी वजन के लिए जानी जाती हैं। भारतीय बाजारों में आपको कई बेहतरीन और अच्छी नस्ल के बकरे मिल जाएंगे। जब भी आप बकरा चुनें, तो उसकी ब्रीड के साथ-साथ उसकी तंदुरुस्ती का पूरा ख्याल रखें।
इस्लाम में कुर्बानी करने का एक खास और सही तरीका बताया गया है, जिसे हलाल कहा जाता है। यह एक बेहद पवित्र धार्मिक काम है, इसलिए इसे पूरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। नियम यह भी कहता है कि कुर्बानी से पहले जानवर को अच्छा खाना-पानी दिया जाए और उससे प्यार जताया जाए ताकि वह दिमागी और शारीरिक रूप से पूरी तरह शांत और स्वस्थ रहे।
कुर्बानी के दिन से पहले ही कुछ जरूरी तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। सबसे पहले तो यह देखें कि आपके पास कुर्बानी करने के लिए एक साफ और सही जगह हो। इसके साथ ही कुर्बानी में इस्तेमाल होने वाले जरूरी औजार जैसे चाकू और रस्सियां पहले से ही तैयार रखें। अगर आपकी तैयारी पहले से पक्की होगी तो सारा काम बिना किसी परेशानी के और अदब के साथ पूरा हो जाएगा।