कोरोना काल में घरों में कैद होकर डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं परिवारों के बुजुर्ग

By अशोक मधुप | May 22, 2021

कोरोना के इस दौर में पारिवारिक तानाबाना बिखर गया है। आदमी एकाकी होकर रह गया है। बच्चों की दिनचर्या बिल्कुल बदल गई है। आउट डोर गेम बंद हो गए। इन्डोर गेम भी न के बराबर खेले जा रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल मिल गए तो वे मोबाइल में ही लग गए। वही उनका जीवन हो गया। गेम भी उसी पर खेले जाने लगे। इस दौर में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए तो परिवार के बुजुर्ग। वे एक कमरे में कैद होकर रह गए। घूमना तथा सामाजिक गतिविधि रुक गई। बेटे−बहुओं द्वारा कमरों में लगाए गए टेलीविजन ही उनके साथी बन गये। इस पर आ रहीं कोरोना की भयावह तस्वीर और समाचार इन्हें निराशा की ओर ले जा रहे हैं।

कोरोना के सवा साल के दौरान अब ये अपने कमरे तक ही सीमित होकर रह गये। घर से बाहर निकलना बंद हो गया। कोरोना का बैक्टीरिया न आ जाए, इसलिए अब घर में अखबार भी नहीं आता। पहले परिवार के बड़े, बच्चों को बाहर जाने से रोकते थे। अब बुजुर्गों को रोका जा रहा है। दरवाजा खोल नहीं पाते कि बेटे-बहू की जोरदार आवाज सुनाई पड़ती है, कहां जा रहे हो? पहले ये अपने बच्चों को टोकते थे, अब बच्चे जरा−जरा-सी बात पर टोकते हैं। इन हालात से इनमें झुंझलाहट और गुस्सा बढ़ रहा है। टेलीविजन के समाचार में कोरोना की दिखाई जाती भयावहता इनमें डिप्रेशन पैदा कर रही है। कोरोना से मरने वालों के फोटो और श्रद्धांजलि के संदेश इन्हें और तनाव दे रहे हैं। मोबाइल से नंबर डायल करते ही कोरोना बचाव की बजती टोन से लेकर यू−ट्यूब पर कोरोना की खबरें और उपचार के बारे में इतनी वीडियो आ रही हैं, कि आदमी की समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करे।

बुजुर्ग अपनी बात किसी को बता नहीं पाते। हर समय तनाव में रहते हैं। कुछ का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने लगा है। शुगर बढ़ रही है, नींद नहीं आ रही। ये ही आगे चलकर परेशानी का कारण होंगे। लगातार लेटे रहने से आगे चलकर और बीमारी लगेंगी। रीढ़ की हड्डी धीरे-धीरे कमजोर होगी। परिवार के युवक अपनी दिनचर्या में व्यस्त होने के कारण अपने अभिभावक को सुविधाएँ सब दे रहे हैं, समय नहीं दे पा रहे। माता-पिता को धन दौलत की नहीं अपने बच्चों के सामीप्य की लालसा होती है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए अपनाएं यह कुछ उपाय

किसी की एक कहानी है। पति−पत्नी दीपावली की खरीदारी करने जा रहे हैं। पहले दिन मां से कह दिया है कि वह अपनी जरूरत के सामान की लिस्ट बना दे। कार चलाते बेटा पत्नी से कहता है कि देखो मां ने क्या मंगाया है। वह मां के दिए कागज पढ़ती है−

"तुम्हारे शहर की किसी दुकान से मिल जाए तो फुरसत के कुछ पल मेरे लिए लेते आना। ढलती हुई सांझ हूं मैं अब। मुझे गहराते अंधियारे से डर लगता है। मौत को पल−पल अपनी ओर आते देख मैं डरती हूँ, किंतु ये सत्य है। अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है। जब तक जीवित हूँ तब तक कुछ पल मेरे पास बैठकर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन बांट लिया करो।"

बंद कमरा, टीवी पर आते हृदय विदारक समाचार, फेसबुक पर सुबह से शुरू हो जाने वाले मौत के संदेश इन्हें डरा रहे हैं। डिप्रेशन में ले जा रहे हैं। आज इन्हें जरूरत है थोड़े स्नेह, प्यार और अपनों के समय की। ये मिलने लगे तो इनको मानो अमृत मिल जाएगा, इनका जीवन सरल हो जाएगा।

-अशोक मधुप

प्रमुख खबरें

UP में विकास और Infrastructure प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों, सीएम Yogi Adityanath के कड़े निर्देश

Delhi Police ने Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi पर दर्ज कीं 4 FIR

Elon Musk के अंबानी वाले सवाल पर बोले Rahul Gandhi, दूसरे व्यक्ति से मिलेंगे तो और पता चलेगा

विवाद में उलझा Arunachal Pradesh, Ranji Trophy के पहले मैच से बाहर होने का खतरा