Election Commission की मांग खारिज, Bombay High Court ने 10 दिनों में Voter List अपडेट करने को कहा

By अभिनय आकाश | Nov 05, 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को एक ऐसे परिवार को राहत दी, जिनके नाम मतदाता सूची से गायब थे। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल करे। कोर्ट ने आयोग से कहा कि नाम जोड़ने से पहले वह परिवार के पते की पुष्टि कर ले। न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही सुप्रीम कोर्ट 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) से जुड़े एक अलग मामले की सुनवाई कर रहा है, लेकिन यह याचिका उस मामले से संबंधित नहीं है। पीठ ने कहा कि हम याचिका स्वीकार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट SIR के मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है, लेकिन यह SIR का मामला नहीं है। चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए गौरीश अग्नि ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की, ताकि आयोग सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दे सके। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया।

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यह मामला परेश वसंत सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों से जुड़ा है, जो गोवा के सांता क्रूज़ विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं। परिवार ने उसी विधानसभा क्षेत्र के भीतर अपना निवास स्थान बदल लिया था और अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के निर्देश पर पता बदलने के लिए 'फॉर्म 8' (Form 8) जमा किया था। हालांकि, SIR प्रक्रिया के दौरान जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम नहीं थे। बाद में उन्हें पता चला कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) ने उनके 'फॉर्म 8' आवेदनों को खारिज कर दिया था, लेकिन यह जानकारी उन्हें तब मिली जब दावे और आपत्तियां  दाखिल करने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी।

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इसके बाद चुनाव आयोग ने परिवार को नए सिरे से 'फॉर्म 6' (Form 6) आवेदन जमा करने की सलाह दी। परिवार ने इस सुझाव को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि 'फॉर्म 6' पहली बार मतदाता पंजीकरण के लिए होता है, जबकि 'फॉर्म 8' का उपयोग मौजूदा मतदाता अपने विवरण (जैसे पता) को अपडेट करने के लिए करते हैं। सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि SIR एक नई रिवीजन प्रक्रिया है, जो नियमित 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) से अलग है। आयोग ने बताया कि उनका सॉफ्टवेयर 'फॉर्म 8' आवेदनों को परिवार के मौजूदा EPIC रिकॉर्ड से नहीं जोड़ सका, क्योंकि उनके पिछले पते पर 'एन्यूमरेशन स्लिप' (enumeration slips) जमा नहीं की गई थीं। नतीजतन, तकनीकी कारणों से ये आवेदन अपने आप खारिज हो गए।

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