फुल टू मनोरंजन है चुनाव और आईपीएल (व्यंग्य)

By अरुण अर्णव खरे | May 04, 2019

उस दिन मुरारी जी अचानक टकरा गए, मन हुआ कि पूछू- क्या चल रहा है, पर यह सोच कर रुक गया कि कहीं वह यह न कह दें कि फॉग चल रहा है, जैसा कि आजकल हर जगह सुनाई दे रहा है। मुझे असमंजस में देखकर वही बोले- "क्या चल रहा है भाई।"

"सब ठीक ठाक ही है"- मैंने भी वही पुराना घिसा-पिटा उत्तर दिया जो सदियों से ऐसे प्रश्नों के जवाब में दिया जाता रहा है, साथ ही पूछ भी लिया- "आप कैसे हैं" 

इसे भी पढ़ें: भविष्य बताने वाले राजनीतिक माहिर (व्यंग्य)

"मैं तो बहुत खुश हूँ-- जिन्दगी में इतना मनोरंजन कभी नहीं हुआ यार-- एकदम लाइफ टाइम मनोरंजन-- मनोरंजन का ओव्हर डोज हुआ जा रहा है"- कहते हुए मुरारी जी तरंग में आ गए। मुझे लगा तैतालीस-चवालीस डिग्री की गर्मी में बाहर घूम रहे हैं अत: सिर चकरा रहा है इनका, जो उनकी बातें सुनने के बाद सही सिद्ध भी हुआ। मैंने धीरे से कहा- "इतनी गर्मी है-- मैं तो घर से बाहर ही नहीं निकलता - और आप फुल टू मनोरंजन की बात कर रहे हैं"

"तुम तो शुरु से नीरस आदमी हो -- देखते नहीं देश में चुनाव और आईपीएल साथ-साथ चल रहे हैं - कितना जबदस्त मनोरंजन हो रहा है -- दिन में रैलियों, रोड शो और सभाओं में मर्यादा की धज्जियाँ उड़ते देखते हैं और शाम से देर रात तक स्टेडियम के भीतर चौके और छक्के उड़ते। इसके साथ ही चियर्स लीडर्स भी हैं मनोरंजन के लिए। चुनाव और आईपीएल में आपस में गहरा सम्बन्ध भी है"

"वो कैसे"

"बेगूसराए, भोपाल, लखनऊ, अमेठी के मैदानों में भी आईपीएल की तरह रोमांचकारी मैच खेले जा रहे हैं। बेगूसराए की पिच पर एक नवोदित बल्लेबाज ने रिषभ पंत जैसी धुआँधार बल्लेबाजी की -- अब देखना है कि वह विराट कोहली की टीम जैसा फिसड्डी साबित होता है या दिल्ली केपिटल जैसा छा जाता है।"

"अरे इस मनोरंजन की ओर तो मेरा ध्यान ही नहीं गया" - मैंने कहा।

"सुनो, कल की बात बताता हूँ -- किंग्स इलेवन और राजस्थान रायल्स के मैच में दो सहेलियाँ को गले में बाँह डालकर फ्लाइंग किस करते देखा था और आज दो सन्यासिनों का अद्भुत मिलन देखा -- छोटी फफक-फफक कर रोई और बड़ी ने भावुक होकर पैर छू लिए -- है न मजेदार बात"

"आपकी नजर कमाल की है" - मैंने उन्हें झाड़ पर चढ़ाया।

इसे भी पढ़ें: गरीबी और अमीरी (व्यंग्य)

"अरे कल एक खेत में आग लगी थी और सीरियल की पुरानी बहू ने हैण्डपम्प से पानी निकाल- निकाल कर जैसे-तैसे आग बुझाई और शाम को रहाने ने अट्ठावन गेंदों में सेंचुरी ठोंक कर मैदान में आग लगा दी। अब कोई सनातनी बहू तो वहाँ थी नहीं और कोई गेंदबाज भैया भी उस आग को नहीं बुझा सका"

"रहाने की उस पारी को तो मैंने भी देखा था पर आग को नहीं देख सका" 

"देखने के लिए केवल आँखें ही नहीं कॉमनसेंस भी चाहिए -- जो तुममें है नहीं" - मुरारी जी को मानो मनचाही लूज डिलीवरी मिल गई थी और उन्होंने धोनी सरीखा हैलीकाप्टर शॉट लगा दिया।

"आईपीएल की एक बात मुझे बहुत अच्छी लगती है"- मुरारी जी इस बार स्वर को मद्धिम रखते हुए बोले- "इसमें इतने देशों के खिलाड़ी एक टीम में खेलते हैं पर उनमें गजब का भाईचारा दिखता है जो चुनाव में नजर नहीं आता-- देशी खिलाड़ी भी कब विदेशी बन जाए किसी को पता नहीं।"

राजनीति और क्रिकेट का मेरा ज्ञान सीमित ही है अतएव मुरारी जी की गुगली मेरा मिडिल स्टम्प ले गई। मैं अब असहाय सा खड़ा उनको झूमते हुए पवेलियन की ओर जाते हुए देख रहा था।

- अरुण अर्णव खरे

प्रमुख खबरें

SEBI Order के खिलाफ SAT पहुंचे Zee Entertainment और Punit Goenka, बुधवार को होगी अहम सुनवाई

Lionel Messi को चैंपियन बनाने वाले पिता Jorge Messi का निधन, दिग्गज Rafael Nadal ने जताया गहरा शोक

Aston Villa छोड़ PSG लौटे Lucas Digne, 11 साल बाद फिर पहनेंगे पेरिस की जर्सी, 2029 तक हुआ Deal साइन

5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal