प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार योजना है Garib Kalyan Rojgar Abhiyan

By जे. पी. शुक्ला | Oct 27, 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रोजगार योजना की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत कोरोनोवायरस से प्रभावित लॉकडाउन के दौरान अपने गृह राज्यों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए 50,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान रखा गया है। इस अभियान का नाम "गरीब कल्याण रोजगार अभियान" रखा गया है। यह अभियान 125 दिनों के मिशन मोड में चलाया जायेगा, जिसके अंतर्गत प्रवासी श्रमिकों को रोज़गार देने के लिए 25 विभिन्न प्रकार के कार्यों को तेज़ गति से कराया जायेगा। इसमें गरीबों के लिए ग्रामीण आवास, वृक्षारोपण, जल जीवन मिशन के माध्यम से पीने के पानी के प्रावधान और पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय, ग्रामीण मंडियों, ग्रामीण सड़कों, पशु शेड और आंगनवाड़ी भवन के निर्माण कार्य शामिल  हैं। 

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यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा। 

 

इस योजना के तहत, विभिन्न प्रकार के कार्यों की बास्केट यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक प्रवासी श्रमिक आने वाले 125 दिनों में अपने कौशल के अनुसार रोजगार का अवसर प्राप्त कर सके। इस योजना के द्वारा  सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों को उनके घर के पास ही ही रोजगार मिले और गांवों के विकास में मदद मिले।  

 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गरीब कल्याण रोजगार अभियान MGNREGS से अलग है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme- MGNREGS) एक वर्ष में प्रति घर 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करती है, जबकि गरीब कल्याण योजना, उन प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए एक बार की योजना है, जो अपने गांवों में लॉकडाउन  के दौरान लौटे थे।  

 

गरीब कल्याण रोजगार अभियान के लिए कौन पात्र हैं?

हालाँकि, योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया की घोषणा अभी नहीं की गई है और इसलिए जो क्राइटेरिया इसके लिए अनिवार्य और  महत्वपूर्ण हैं, वे इस प्रकार हैं :

 

- आवेदक राज्य का नागरिक होना चाहिए 

- आवेदक के पास आधार कार्ड होना चाहिए

- आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए

 

इसके लिए www.pmindiawebcast.nic.in पर जाकर ‘PMO गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के बारे में प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण नागरिकों के लिए शुरू की गई योजना “अधिसूचना” की जाँच करें  और फिर ऑनलाइन आवेदन करें पर क्लिक करें। ऑनलाइन आवेदन जैसे ही शुरू किया जायेगा वैसे ही यहाँ सीधा लिंक भी अपडेट कर दिया जायेगा

 

'गरीब कल्याण रोज़गार अभियान' को छह राज्यों के 116 जिलों - बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा में लागू किया जाएगा। अभियान के इन राज्यों के कुल 25,000 प्रवासी श्रमिकों को चुना गया है। इन राज्यों के ज़िलों की संख्या इस प्रकार है-  

 

बिहार: 32 

उत्तर प्रदेश: 31 

मध्यप्रदेश: 24 

राजस्थान: 22 

झारखण्ड: 03 

ओडिसा: 04 

 

बिहार सरकार

बिहार में आने वाले प्रवासी-मजदूरों के भीतर होने वाले पहले तरह के कौशल सर्वेक्षण में राज्य सरकार कुशल और अकुशल श्रमिकों का एक डेटाबेस तैयार कर रही है, ताकि उनके लिए रोजगार का सृजन हो सके। प्रवासी श्रमिकों की लगातार वापसी के साथ, उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना, वह भी जब चुनाव सिर पर हों, वस्तुतः सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस चुनौती को पूरा करने के लिए, युद्धस्तर पर बिहार के जीविका विंग के तहत प्रवासी कामगारों की कौशल रूपरेखा जारी है। उद्योग, जल संसाधन, शहरी विकास, सड़क निर्माण, कृषि और लघु सिंचाई सहित राज्य सरकार के सभी विभागों ने अपने संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना शुरू कर दिया है, ताकि COVID-19 के प्रकोप के बीच घरों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों को संलग्न किया जा सके।  इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने brlps.in साइट लांच की है।

 

उत्तरप्रदेश सरकार

उत्तर प्रदेश में 12 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर आ चुके हैं। इसको ध्यान में रखते हुए योगी सरकार सभी मजदूरों का पूरा डाटा तैयार कर रही है। उन्हें उनकी योज्यता के अनुसार कार्य दिया जाएगा ताकि उनके कौशल का सही उपयोग हो सके। वहीं उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रवासी मजदूरों का डाटा संग्रह करने के लिए प्रवासी राहत ऐप भी शुरू किया है। इस एप के जरिये सरकार उत्तप्रदेश में आने वाले प्रवासी मजदूरों का डाटा एकत्रित कर रही है, जिसमें उनके कौशल के अनुसार नौकरी या आजिविका प्रदान किया जा सके। कोई भी व्यक्ति यूपी सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के होमपेज यानी http://rahatup.in पर दिए गए ऐप लिंक के माध्यम से आसानी से प्रवासी राहत ऐप डाउनलोड कर सकता है।

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मध्यप्रदेश सरकार

प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से, मध्य प्रदेश ने रोज़गार सेतु पोर्टल लॉन्च किया जो श्रमिकों को उनके कौशल और दक्षता के अनुसार रोजगार प्रदान करेगा।  'रोजगार सेतु' योजना के अंतर्गत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतो और शहरी क्षेत्रों के वार्ड क्षेत्रों द्वारा प्रवासी श्रमिकों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वेक्षण के समय के बारे में उनके पूर्व नियोजन और कोशल की जानकारी भी प्रवासी श्रमिक पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। पोर्टल पर सभी डेटाबेस बनाने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। सभी श्रमिकों को इस योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं को इस योजना के तहत पंचायत / वार्ड कार्यालय के माध्यम से पंजीकृत कराना होगा। 

 

राजस्थान सरकार

राजस्थान सरकार द्वारा शुरू किया गया 'राज कौशल' पोर्टल’ जनशक्ति, रोज़गार और उद्योग को सशक्त बनाएगा। सरकार के एक नोट में कहा गया है कि यह देश का पहला ऐसा पोर्टल है, जिसमें प्रवासी श्रमिकों को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा। यह उन प्रवासी श्रमिकों को नौकरी प्रदान करने में मदद करेगा जो अन्य राज्यों से लौटे हैं और बेरोजगार हैं। पोर्टल - rajkaushal.rajasthan.gov.in - श्रम विभाग के लिए सूचना प्रौद्योगिकी और संचार के राज्य विभाग द्वारा विकसित किया गया है। श्रमिक राज्य में प्रवेश करते समय फॉर्म -4 में भरे गए प्रवासी मजदूरों के मोबाइल फोन ओटीपी का उपयोग करके लॉग इन कर सकते हैं और ओटीपी सत्यापन के बाद पंजीकरण पृष्ठ पर जा सकते हैं। 

 

झारखण्ड सरकार 

झारखंड के सभी जिलों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत होगी। इसमें प्रवासी मजदूरों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा और रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। राज्य सरकार इसकी तैयारी शुरू कर रही है। इसके लिए मुख्य सचिव ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी को आवश्यक निर्देश दे  दिया है। लेकिन अभी गोड्डा, गिरिडीह और हजारीबाग जिले के प्रवासी मजदूरों के लिए इसका चयन किया गया है। इसमें प्रवासी कामगारों को लघु अवधि कौशल प्रशिक्षण और कार्यानुभव सत्यापन प्रशिक्षण कराया जाएगा। जिन संस्थानों में कुशल कामगारों की आवश्यकता होगी, वहां उन्हें अवसर प्रदान किए जाएंगे और वहीं प्रशिक्षण के बाद कामगार स्वरोजगार भी कर सकेंगे। रोज़गार के सिलसिले में जानकारी और नामांकन के लिए झारखण्ड की वेबसाइट https://jharkhandpravasi.in पर लॉगिन किया जा सकता है। 

 

ओडिसा सरकार 

कोविद -19 महामारी की चपेट में आने से आर्थिक और आजीविका गतिविधियों को बचाने के लिए ओडिशा सरकार ने 1700 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की, जिससे सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोगों को रोज़गार और आय सृजन के अवसर प्रदान किए जा सके।  ओडिशा के चार जिलों - गंजम, भद्रक, बालासोर और बोलनगीर को गरीब कल्याण रोज़गार योजना में शामिल  किया गया है। ओडिशा के फंसे हुए लोग जो राज्य वापस जाना चाहते हैं, उनको covid19.odisha.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इस पोर्टल पर सभी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकृत के किसी को भी राज्य में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।


- जे. पी. शुक्ला

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