मनरेगा का खत्म होना सामूहिक नैतिक विफलता, अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा: सोनिया गांधी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 22, 2025

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को मोदी सरकार पर मनरेगा को डेथ बाई थाउजेंड कट्स स्ट्रैटजी (हजार छोटे छोटे घाव देकर खत्म करने की रणनीति) से खत्म करने का आरोप लगाया और कहा कि महात्मा गांधी के सर्वोदय के दृष्टिकोण को साकार करने वाली योजना का अंत होना हमारी समूहिक नैतिक विफलता है। सोनिया ने अंग्रेजी दैनिक द हिंदू के लिए लिखे एक लेख में यह भी कहा कि उन अधिकारों की रक्षा करने के लिए एकजुट होना होगा जो सबकी सुरक्षा करते हैं।

योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना तो एक बानगी भर है। मनरेगा की वह पूरी संरचना, जो उसके प्रभाव के लिए अत्यंत आवश्यक थी, पूरी तरह से नष्ट कर दी गई है। उन्होंने कहा, यह याद रखना चाहिए कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहल रही है और साथ ही सबसे अधिक अध्ययन एवं मूल्यांकन वाली योजनाओं में से एक भी। इन सभी अध्ययनों ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर इसके परिवर्तनकारी प्रभावों को रेखांकित किया है।

उन्होंने यह दावा भी किया कि राज्यों की वित्तीय स्थिति, जो पहले से ही गंभीर दबाव और संकट में है, अब और अधिक तबाह हो जाएगी। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने लिखा, कार्यक्रम के मांग आधारित स्वरूप को खत्म करने के अलावा, मोदी सरकार ने इस योजना के विकेंद्रीकृत स्वरूप को भी समाप्त कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार यह कहकर भ्रामक दावे कर रही है कि उसने रोजगार की गारंटी 100 दिन (मनरेगा के तहत) से बढ़ाकर 125 दिन कर दी है।

इसे भी पढ़ें: PM Modi ने अरूणाचल के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा का समर्थन करने को लेकर लोगों को धन्यवाद दिया

उन्होंने दावा किया, वास्तव में, मोदी सरकार की मंशा उसके पिछले एक दशक के रिकॉर्ड से साफ समझी जा सकती है, जिसमें उसने लगातार मनरेगा का गला घोंटने का काम किया है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा संसद के पटल पर इस योजना का उपहास उड़ाने से हुई और फिर धीरे-धीरे इसे खत्म करने की रणनीति के तहत यह सिलसिला आगे बढ़ा—जैसे कि स्थिर बजट, लोगों को वंचित करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल और मज़दूरों को भुगतान में देरी।

सोनिया गांधी के अनुसार, ‘‘काम के अधिकार के इस विध्वंस को अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे संविधान और उसके अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान द्वारा किए जा रहे लंबे हमले के हिस्से के रूप में समझना चाहिए।’’ उन्होंने दावा किया कि अब तो मतदान का सबसे मौलिक अधिकार भी अभूतपूर्व हमले का सामना कर रहा है। कांग्रेस की शीर्ष नेता ने कहा, मनरेगा ने महात्मा गांधी के सर्वोदय के दृष्टिकोण को साकार किया और काम के संवैधानिक अधिकार को लागू किया।

इसे भी पढ़ें: मोहन भागवत का बड़ा बयान- 'भारत हिंदू राष्ट्र है और रहेगा, संविधान की मंजूरी की आवश्यकता नहीं'

इसका खत्म होना हमारी सामूहिक नैतिक विफलता है—जिसके आने वाले वर्षों तक भारत के करोड़ों मेहनतकश लोगों पर वित्तीय और मानवीय परिणाम पड़ेंगे। सोनिया गांधी ने इस बात पर जोर दिया, अब पहले से कहीं अधिक यह आवश्यक है कि हम एकजुट हों और उन अधिकारों की रक्षा करें जो हम सबकी सुरक्षा करते हैं। सोनिया गांधी ने बीते शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है और करोड़ों किसानों, श्रमिकों एवं भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है।

प्रमुख खबरें

Peaceful Protest संवैधानिक अधिकार, Supreme Court ने NEET-UG प्रदर्शनों पर Police Excess पर जताई गंभीर चिंता

टीवी एक्ट्रेस Akanksha Chamola का ग्लैमरस अवतार: इन 6 Western Outfits के साथ खुद को दें Trendy Look

Dr APJ Abdul Kalam Memorial Day 2026: अखबार बेचने से Missile Man बनने तक का सफर, आज भी युवाओं की Inspiration हैं कलाम

NEET पेपर लीक बवाल के बीच Lok Sabha में आया Anti-Paper Leak Bill, हंगामे के कारण कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित