सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकला

By अभिनय आकाश | Jun 06, 2026

जब अमेरिका 40 दिनों की जंग में ईरान पर समंदर और आसमान से हमले कर रहा था। उस वक्त इजरायल ने ईरान की जमीन पर उतरने की एक साजिश रची थी और उसमें ईरान के एक करीबी पड़ोसी ने इजराइल का साथ दिया था। जंग के दो माह बाद अब धीरे-धीरे रिपोर्ट्स के जरिए साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। ईरान के खिलाफ इजरायल के इस प्लान में साथ देने वाला कोई अरब देश नहीं बल्कि उससे बॉर्डर शेयर करने वाला अजरबैजान था। अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीएनएन के मुताबिक अजरबैजान के भीतर इजरायल ने युद्ध के दौरान कई सैन्य ठिकाने बनाए थे। इनमें से एक ठिकाना ईरान के शहर तबरीज से महज 60 किमी की दूरी पर था। क्योंकि ईरान और काकेशस मुल्क अज़रबैजान के बीच 689 किमी की सरहद है। अब मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि अजरबैजान में बनाए गए अपने मिलिट्री बेस से इसराइल ने ना सिर्फ ईरान पर हमले अंजाम दिए बल्कि यहीं से आईआरजीसी के खुफिया चीफ को मारने के लिए प्लेन भी उड़े थे। 

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इजराइल का सारा प्लान फेल हो गया। सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से की गई इस रिपोर्ट में दावा किया है कि अज़रबैजान से ईरान के खिलाफ ऑपरेट किए जाने वाले इस अभियान में इजरायल के कई दर्जन सैनिक शामिल थे। जिनमें इसराइल के हेलीकॉप्टर यूनिट और मोसाद के लोग भी तैयार थे। हालांकि अज़रबैजान ने अपनी जमीन ईरान के खिलाफ इस्तेमाल होने के दावों से साफ इंकार कर दिया है। लेकिन यह भी सच है कि अज़रबैजान ने ईरान के दुश्मन से पक्की दोस्ती तो गांठ रखी है। इजरायल का बेहद करीबी दोस्त है अज़रबैजान। यहां तक कि इजराइल की मदद से चलने वाला मुस्लिम बहुल मुल्क है अज़रबैजान। शिया मुस्लिम बहुल मुल्क होने के बावजूद अज़रबैजान ने फिलिस्तीन इसराइल के विवाद पर कभी खुलकर कुछ नहीं कहा। इजरायल अज़रबैजान को फौज और खेती को मजबूत करने में मदद करता है। क्योंकि अज़रबैजान का इन क्षेत्रों में कुछ खास एक्सपीरियंस नहीं है। इसलिए अज़रबैजान अपना तेल इजरायल को बेचता है और कहा जाता है कि अज़रबैजान का तेल तुर्की के रास्ते इजरायल पहुंचता है जो उसकी खपत का 40% है। खास बात यह है कि इसमें वो ऑयल भी है जो टैंकों और फाइटर जेट में इस्तेमाल किया जाता है और उन्हीं से इजरायल ने गाजा पर भी जबरदस्त तबाही मचाई है। अब देखना होगा कि किसी फाइनल डील पर पहुंचने के बाद बनी नई कंडीशन में ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मोजतबा खामनेई अपने पड़ोसी देश अज़र-बैजान के धोखे से कैसे निपटते हैं?

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