रूसी तेल रोकने चला था यूरोप, अब खुद ही फंस गया, ईरान को लेकर UNSC में बड़ा खेल हो गया

By अभिनय आकाश | Sep 02, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्लान रूस, ईरान और चीन को तगड़ा झटका देने का था। इसके लिए उन्होंने भारत को चुना। रूसी तेल खरीदारी पर रोक लगाने के लिए भारत पर टैरिफ लगाकर अमेरिका ने कितनी बड़ी गलती की है। इसका एहसास अब बहुत जल्द अमेरिका को होने वाला है। चीन पहुंचने के साथ ही जहां भारत, रूस और चीन का गठबंधन दिखाई पड़ा। वहीं दूसरी तरफ ईरान और उत्तर कोरिया के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी पल चीन पहुंचने वाले हैं। लेकिन ये जब तक चीन पहुंचते उससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को एक बहुत बुरी खबर सुना दी। सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि इसने पूरे पश्चिम को हिलाकर रख दिया। वो पश्चिमी देश जो लगातार ईरान पर हमलावर थे। उस ईरान के समर्थन में अब रूस और चीन ने ऐसा फैसला लिया है। जिसका असर सीधे यूरोपीय देशों पर पड़ेगा। 

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चीन और रूस, तीन यूरोपीय देशों के साथ, विश्व शक्तियों के साथ ईरान के 2015 के परमाणु समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 में अपने पहले कार्यकाल में संयुक्त राज्य अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था। यूरोपीय देशों ने पिछले हफ़्ते "स्नैपबैक मैकेनिज़्म" शुरू किया, जिसमें ईरान पर इस समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के बदले उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों से राहत दी गई थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची द्वारा सोमवार को एक्स पर प्रकाशित एक पत्र में कहा गया है कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी द्वारा अपनाया गया कदम "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकार और कार्यों का दुरुपयोग" करता है।

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