अब यूरोप ने शुरू किया पलटवार, ठोकेगा ऐसा टैरिफ, अमेरिका को लगेगा 93 बिलियन डॉलर का झटका

By अभिनय आकाश | Jan 19, 2026

अमेरिका और यूरोप के बीच एक ऐसी ट्रेड वॉर छिड़ गई है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड को हड़पने की जिद अब अमेरिका पर ही भारी पड़ती दिखाई दे रही है। यूरोप ने साफ कर दिया है कि वो ट्रंप की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। खबर है कि यूरोपीय संघ अमेरिका को 93 बिलियन यूरो यानी करीब 107 अरब डॉलर का तगड़ा झटका देने की तैयारी में है। दरअसल यह लड़ाई अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही बल्कि सीधे तौर पर दुनिया की इकॉनमी को हिलाने वाली जंग बन चुकी है। यह पूरा विवाद ग्रीनलैंड को लेकर शुरू हुआ। ट्रंप किसी भी तरह से ग्रीनलैंड को कब्जा जमाना चाहते हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर चेतावनी भी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर समझौता नहीं हुआ तो 1 फरवरी से डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन समेत आठ यूरोपीय देशों के सामान पर 10% एक्स्ट्रा टेरिफ लगा दिया जाएगा। 

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इतना ही नहीं 1 जून से इस टैक्स को बढ़ाकर 25% करने की धमकी भी दी गई। हालांकि ट्रंप की इस धमकी के बावजूद भी यूरोप दबने का नाम नहीं ले रहा। ट्रंप की इस ब्लैकमेलिंग के जवाब में यूरोपीय संघ ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने साफ कर दिया कि वह चुप नहीं बैठेंगे। फाइनेंसियल टाइम्स के रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप अब अमेरिका पर 93 बिलियन यूरो का जवाबी टैरिफ लगाने या अमेरिकी कंपनियों को अपने बाजार से बाहर का रास्ता दिखाने जैसे कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है। यह जवाबी कारवाई 6 फरवरी से लागू हो सकती है। यानी ट्रंप अगर 1 फरवरी को टैक्स बढ़ाते हैं तो महज 5 दिन के अंदर अमेरिका को यूरोप से करारा जवाब मिल जाएगा। तनाव इतना बढ़ चुका कि बात सिर्फ व्यापार तक नहीं रही। इन यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड के आसपास आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सेनाएं तक तैनात कर दी।

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वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्कानी ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। कनाडा ने साफ कहा है कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए और ग्रीनलैंड का भविष्य डेनमार्क को ही तय करना चाहिए। कुल मिलाकर ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की नीति अब यूरोप के साथ उनके रिश्ते में बड़ी दरार डाल रही है। अब यहां सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस आर्थिक नुकसान के दर से पीछे हटेंगे या फिर दुनिया एक ऐसी आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ जाएगी जिससे उभना मुश्किल होगा। 

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