By अभिनय आकाश | Mar 18, 2025
सेक्युलर भारत में खुलेआम हिंदू धर्म को कोसा जाता है। हिंदू देवी-देवताओं का आपमान किया जाता है। मगर किसी दूसरे धर्म पर अफवाह भी पूरा शहर जला देती है। नागपुर में भी ठीक नही हुआ। नागपुर में औरंगजेब को लेकर बवाल मच गया। दरअसल नागपुर में शाम को एक अफवाह ने तूल पकड़ लिया, जिसमें यह कहा गया था कि एक प्रतीकात्मक कब्र पर रखी गई चादर पर धार्मिक चिन्ह था। इसी अफवाह के कारण मामला गरमाया और हिंसा की घटनाएं हुईं। इस हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस हिंसा में 12 दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और घटना स्थल पर 80 से 100 लोगों का जमावड़ा था। हिंसा की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक क्रेन और दो जेसीबी समेत चार पहिया वाहनों को जलाया गया। इसके अलावा कुछ लोगों पर तलवार से भी हमला किया गया।
नागपुर में हुई हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। कई लिबरल हिंदू और कट्टरपंथी हिंसा फैलाने वालों का समर्थन करते दिख रहे हैं। ये बोल रहे हैं कि हिंदू संगठन आखिर औरंगजेब की कब्र क्यों हटवाना चाहते हैं। ये औरंगजेब का विरोध क्यों कर रहे हैं? भारत में जिस तरह से औरंगजेब का समर्थन होता है, उसे कोई इजरायली देख ले तो हैरान हो जाएगा। इजरायल में कभी ऐसा नहीं होगा जो नागपुर में हुआ है। भारत में औरंगजेब के समर्थकों को इजरायल से कुछ सीखना चाहिए। क्या कोई इजरायलियों से ये उम्मीद कर सकता है कि यहूदियों का नरसंहार करने वाले हिटलर की पूजा करेंगे। वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। भारत में आपको औरंगजेब के समर्थक मिल जाएंगे। लेकिन इजरायल में आपको हिटलर का कोई समर्थक नहीं मिलेगा। लेकिन भारत में अत्याचारों और क्रूरता पराकाष्ठा पार करने वाले मुगलों को हीरो बताया जाता है। झूठा नैरेटिव भी चलाया जाता है कि औरंगजेब ने तो दो-चार मंदिर भी बनवाए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 177 गांव और कस्बे ऐसे हैं जिनका नाम औरंगजेब के नाम पर है। इनमें महाराष्ट्र का शहर औरंगाबाद भी था, जिसका नाम अब छत्रपति संभाजी नगर कर दिया गया है।