Haemophilia Disease: मामूली चोट भी हो सकती है जानलेवा, जानें इस Bleeding Disorder के लक्षण

By अनन्या मिश्रा | Apr 17, 2026

हीमोफीलिया एक आनुवांशिक ब्लीडिंग डिसऑर्डर होता है। इस बीमारी में ठीक तरह से ब्लड का क्लॉट नहीं बन पाता है। जिससे ब्लड लंबे समय तक पीड़ित व्यक्ति से बहता रहता है। चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा भी साबित होता है, क्योंकि ब्लड का बहना जल्दी बंद नहीं होता है। ऐसा इसलिए होता है कि ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए जरूरी क्लॉटिंग फैक्टर्स नाम के प्रोटीन की अनुपस्थिति होती है। आमतौर पर यह बीमारी पुरुषों को होती है, लेकिन बता दें कि यह बीमारी महिलाओं द्वारा फैलती है।

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हीमोफीलिया की वाहक

एक्सपर्ट की मानें, तो महिलाएं हीमोफीलिया की वाहक होती हैं। हालांकि यह तब तक जिंदगी को खतरे में डालने वाला डिसऑर्डर नहीं माना जाता है, जब तक कि किसी जरूरी अंग से ब्लीडिंग न होने लगे। यह एक गंभीर रूप से कमजोर करने वाला डिसऑर्डर हो सकता है, जिसका कोई इलाज नहीं है।

मां या बच्चे के जीन के एक नए उत्परिवर्तन की वजह से करीब एक तिहाई मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में जब मां वाहक होती है और पिता में यह विकार नहीं होता है। तो लड़कों में हीमोफीलिया होने का 50% अंदेशा होता है। वहीं लड़कियों के वाहक होने का 50% जोखिम रहता है। इस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जब गर्दन में दर्द, धुंधली निगाह, ज्यादा नींद, बार-बार उल्टी और एक चोट से लगातार ब्‍लड बहने जैसे लक्षण दिखाई दें।

हीमोफीलिया के प्रकार

हीमोफीलिया ए

हीमोफीलिया बी

हीमोफीलिया सी

लक्षण

जोड़ों में सूजन और दर्दहोना

शरीर पर नीले-नीले निशान बनना

चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना

बिना वजह नाक से खून आना

छोटे घाव का भी देर से ठीक होना

हीमोफीलिया के लिए टिप्‍स 

एक्सपर्ट के मुताबिक पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी बॉडी के वेट को बनाए रखने, मसल्स और हड्डियों की शक्ति में सुधार करने में सहायता कर सकती है। लेकिन आपको किसी भी ऐसी फिजिकल एक्टिविटी से बचना चाहिए, जोकि चोट या फिर ब्लीडिंग की वजह बन सकती है।

अपने दांतों और मसूड़ों की अच्छे से साफ-सफाई करें। वहीं डेंटिस्ट से सलाह ले सकते हैं कि मसूड़ों से ब्लड को बहने से कैसे रोका जाए।

ब्लड थिनिंग दवा जैसे कि हेपरिन और वार्फरिन से बचना चाहिए। इबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी ओवर-द-काउंटर दवाओं से बचना चाहिए।

वहीं ब्लड इंफेक्शन को रोकने के लिए रेगुलर टेस्ट करें और हेपेटाइटिस ए और बी इंजेक्शन से बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। 

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