श्रमिकों के पलायन ने बढाई उद्योगों की मुश्किलें, चालू हुई फैक्ट्रियां पर मजदूरों के पड़े लाले

By दिनेश शुक्ल | May 16, 2020

भोपाल। कोरोना संकट के बीच गिरती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केन्द्र सरकार ने उद्योग नीति में बदलाव के साथ ही इन उद्योगों को खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन प्रवासी मजदूरों के पलायन ने इन उद्योगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। एक तरफ जहाँ लॉक डाउन में बंद हुए कारखानों को दोबारा शुरू करने के लिए इन उद्योगों के बाद कच्चे माल की कमी है तो दूसरी तरफ पर्याप्त मात्रा में मजदूर न मिल पाने की वजह से समस्या बनी हुई है। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने तो श्रम कानूनों में बदलाव की घोषणा के साथ ही उद्योगों को विशेष रियायते देने की बात भी कही है। 

जबकि राज्य सरकार द्वारा शर्तों के साथ शुरू करवाए गए उद्योगों का अभी भी बुरा हाल है। प्रदेश के राजधानी भोपाल के पास रायसेन जिले के उद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में अभी आंशिक रूप से उद्योग खुलने शुरू हुए है। लेकिन यहाँ भी वही मजदूरों और कच्चे माल की समस्या इन फैक्ट्रियों के सामने खड़ी है। यहाँ से प्रतिदिन करीब 30 हजार करोड़ के विभिन्न उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इसमें से 6 हजार करोड़ के कई प्रोडक्ट विभिन्न देशों में निर्यात भी किए जाते हैं। जिसकी वजह से रोजाना करीब 100 से 150 करोड़ रूपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है। राज्य शासन ने गाइड लाइन तो जारी कर दी कच्चे मामल की उपलब्धता न होना, मजदूर और अन्य आवश्यकताएं पूरी न होने से 450 उद्योग शुरू ही नहीं हो पा रहे है। वही लगभग 30 प्रतिशत के करीब उद्योग शुरू हुए भी है लेकिन यहाँ भी उत्पादन 50 फीसदी के करीब ही हो पा रहा है। 

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लॉक डाउन का सबसे अधिक असर ऑटो पॉवर कॉटन यार्न और इलेक्ट्रॉनिक्स पर पड़ रहा है। यहाँ संचालित इकाईयों को कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यही नहीं जो माल तैयार पड़ा है उसकी सप्लाई नहीं हो पा रही है। वही अपने-अपने जिलों पर प्रदेशों को लौट गए प्रवासी मजदूरों की वजह से समस्या और बढ़ गई है। प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में जहाँ 60 हजार मजदूर काम कर रहे थे वही अब यह संख्या 15 हजार के आसपास रह गई है। आने वाले दिनों में भले ही सरकार उद्योगों के लिए कई रियायतों की घोषणा करे लेकिन श्रमिकों की कमी से इन उद्योगों को एक दो होना ही पडेगा। 

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