By अभिनय आकाश | Aug 21, 2026
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में गुरुवार को पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच 20,000 से ज़्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को खाड़ी देशों (मुख्य रूप से सऊदी अरब और UAE) से सुरक्षा चिंताओं और अन्य वजहों से वापस भेज दिया गया। नारकोटिक्स कंट्रोल मिनिस्ट्री के आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौरान, कई पाकिस्तानियों को अपने शहरों में ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री शूट करने या अपलोड करने के आरोप में हिरासत में लिया गया या वापस भेज दिया गया। इन आंकड़ों में छह देशों वाले 'गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल' (GCC) से डिपोर्ट किए गए लोगों की जानकारी शामिल है। इस काउंसिल में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि डिपोर्टेशन की कार्रवाई सुरक्षा कारणों, तय समय से ज़्यादा रुकने, गैर-कानूनी तरीके से घुसने, भीख मांगने, ड्रग्स से जुड़े अपराधों, शरण की मांग खारिज होने और नकली या गलत कागजात होने जैसे कारणों से की गई।
मंत्रालय के आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि ईरानी हमले से जुड़े वीडियो और सामग्री को फ़िल्माने या अपलोड करने के बाद कई पाकिस्तानियों को हिरासत में लिया गया या वापस भेज दिया गया। 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में बहरीन ने देश में ईरानी हमलों के असर से जुड़े वीडियो फ़िल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार करने की घोषणा की थी, जिनमें पांच पाकिस्तानी शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों को ज़्यादा कड़ी जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ा।