ईमेल से आई सुविधा वैक्सीन (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Dec 14, 2020

वैक्सीन की इंतजार में करोड़ों ज़िंदगियां अब धीरे धीरे परेशानी से ख़ुशी की तरफ बढ़ रही हैं लेकिन मेरी ईमेल में सुविधाओं की वैक्सीन की भरमार हो रही है। अगर ईमेल भेजने वाले चाहें तो मेरे खाते में चुटकी बजाते 15000 जमा हो सकते है बस मुझे उनकी बातें माननी है। ऐसा ख़्वाब में भी नहीं हो सकता लेकिन बचत खाते पर 7 प्रतिशत ब्याज मिल सकता है, समस्या यह है कि अपने पास बचत के लिए कुछ भी नहीं। पीएम सुरक्षा योजना के अंतर्गत एक करोड़ का टर्म लोन प्रोसेस में है। एक और ईमेल मास्क लगा कर टपकी, ऋण वितरण विभाग की तरफ से आपका आवेदन सफलतापूर्वक प्रोसैस हो गया है, भेजने वाली कैटरीना है। पंजीकरण पूरा करने का आग्रह है ठीक ऐसे ही कि आप हमारी पार्टी जॉइन करें तो अगले चुनाव में टिकट देंगे। बधाई मेल आ गई, क्रेडिट स्कोर अच्छा है। लीजिए अगली मेल भी आ गई, क्रेडिट कार्ड जल्दी डिस्पैच कर दिया जाएगा, किसने मांगा? कर्ज़ देने के दर्जनों इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। फिर आई है मेल, 15000 कभी भी जमा हो सकते हैं। क्या मेरे अच्छे दिन लौट आए हैं।

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हमेशा डेबिट कार्ड से ज़रूरत के मुताबिक़ सामान खरीदा। बदलते वक़्त ने भी यही सिखाया, सभी प्रवाचकों ने यही शिक्षा दी। मज़ेदार यह कि मेल में आई डी नंबर भी है जो फिल्मी नायिका के नाम से भेजी है। शाम को एक और मेल, जिसमें क्रेडिट कार्ड की लास्ट चार डिजिट्स भी हैं। यह डिजिटल इंडिया का स्वादिष्ट फल है कि मुझे कर्ज़ व क्रेडिट कार्ड की ज़रूरत नहीं है फिर भी ज़िंदगी में डाला जा रहा है। यह मेरे ईमेल खाते के रिसते प्रवेश द्वार का सदुपयोग है। ताज़ा मेल के अनुसार खाते में 3373725 जमा हो सकते हैं। घर का पुराना कोरोना युग का सामान बदलने की प्रेरणा ईएमआई में हाजिर है। पैन विवरण मांग रहे हैं।

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ब्याजमुक्त गोल्ड लोन मिल रहा है। यह नया डिजिटल इंडिया है जिसमें सोशल मीडिया पर तलवारें चल रही हैं तो ईमेल जेब पर चलाने पर उतारू है। लो, आई फोन से 45 लाख जीतने का ऑफर भी आ गया। बुज़ुर्गों ने हमेशा समझाया जितनी चादर हो उतने पैर पसारो लेकिन अब हमारी चादर का नाम राजनीति, धर्म, सम्प्रदाय और जाति हो गया है। चदरिया की बात करें तो अब किसी की भी झीनी नहीं रही। मुश्किल से बचाई प्रॉपर्टी गिरवी रखकर कर्ज़ देने की ग्रेट ऑफर आई है। बाज़ार जाना मुश्किल होता जा रहा है। नियम तोड़ते ग्राहकों की भीड़ और आशा भरी नज़रों से देखते हुए गर्दन पर मास्क लटकाए दुकानदार जो आजकल खूब मुस्कुराहटें भेंट कर रहे हैं। उनके पास भी सुविधाओं के छोटे से बड़े इंजेक्शन उपलब्ध हैं। किसी को नहीं पता मुझे सुविधाओं की नहीं कोरोना वैक्सीन का इंतज़ार है।   


- संतोष उत्सुक

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