Vishwakhabram: तेल ठिकानों पर इजराइली हमले की आशंका से Iran में मचा हड़कंप, पश्चिमी देशों की चिंता भी बढ़ी

By नीरज कुमार दुबे | Oct 05, 2024

लगभग मलबे में तब्दील हो चुके गाजा में लड़ाई के साथ-साथ इजराइली सैनिक दक्षिणी लेबनान में भी सैन्य अभियानों में लगे हुए हैं और दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहे हैं। इसके अलावा बताया जा रहा है कि इजराइल की तैयारी ईरान के तेल ठिकानों को नष्ट करने की भी है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया में तेल के लिए हाहाकार भी मच सकता है। इसलिए पश्चिमी देशों के नेताओं ने इजराइल से संयम बरतने का आग्रह किया है। हम आपको बता दें कि इजराइल की ओर से ईरान पर हमले की जो तैयारियां की जा रही हैं उसमें सैन्य, आर्थिक और यहां तक कि परमाणु लक्ष्यों के खिलाफ हमले भी शामिल हैं। ईरान ने इजराइल की मंशा को भांप कर अपने तेल ठिकानों से तेल को दूसरी जगह स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। ईरान को पता है कि अगर एक भी तेल ठिकाने पर इजराइली मिसाइल गिरी तो पूरा देश लंका की तरह राख में तब्दील हो सकता है। देखा जाये तो ईरान के पास अपेक्षाकृत कमजोर हवाई सुरक्षा है इसलिए वह घबराहट में दिख रहा है। ईरान में इस समय हर ओर अफरातफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि अगर परमाणु स्थलों पर हमला नहीं किया गया तो इजराइल सैन्य या आर्थिक ठिकानों पर हमले जरूर करेगा ताकि ईरान की कमर टूट जाये। दुनिया के कई देश ईरान से तेल का आयात करते हैं जिससे तेहरान को बड़ी आय होती है। यदि ईरान के तेल ठिकाने नष्ट हुए तो दुनिया में तेल की कमी होगी जिससे इस जरूरी ईंधन के भाव बढ़ेंगे और वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी। 

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इस बीच, लेबनान की सरकार का कहना है कि साल भर में वहां 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें से अधिकतर पिछले दो हफ्तों में मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि लेबनानी रेड क्रॉस, लेबनानी सार्वजनिक अस्पतालों और हिज़्बुल्लाह से संबद्ध बचाव कर्मियों सहित चिकित्सा टीमों और चिकित्सा सुविधाओं में लगे हुए कर्मियों पर हमले भी बढ़ गए हैं। हम आपको बता दें कि लेबनान में हिजबुल्लाह की समानांतर सरकार है। वर्तमान में लेबनानी सेना इज़राइल के हमलों का जवाब नहीं दे रही है बल्कि हिज्बुल्ला के सदस्य हमलों का जवाब दे रहे हैं। हम आपको यह भी बता दें कि हिज्बुल्ला हमास से कहीं बड़ा समूह है और लेबनान में कहीं बड़े क्षेत्र में उसका दायरा फैला है। इसके पास हमास की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हथियार हैं, तथा एक विशाल लड़ाकू बल है जिसमें 40,000 से 50,000 नियमित बल शामिल हैं, जो एक पारंपरिक सैन्य संरचना में संगठित हैं।

कुल मिला कर देखा जाये तो पश्चिम एशिया में हालात अब एक साल पहले से भी ज़्यादा अस्थिर हैं। यह संघर्ष मुख्य रूप से इज़राइल और हमास के बीच की लड़ाई से आगे तक फैल गया है। इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच जो संघर्ष चल रहा है वह इजराइल-हमास संघर्ष से भी अधिक खतरनाक प्रतीत हो रहा है। इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच आखिरी बार सीधा युद्ध 2006 में हुआ था, जो 34 दिनों तक चला था और लेबनानी नागरिकों और हिज्बुल्ला लड़ाकों समेत 1,500 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी। तब से इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच छद्म युद्ध जारी है- लेकिन यह इस तरह की तीव्रता वाला नहीं था जैसा कि अब देखने को मिल रहा है। चिंता की बात यह है कि अब यह संघर्ष इस क्षेत्र के बाहर, यहां तक कि विश्व स्तर पर भी फैलने की संभावना बताई जा रही है।

दरअसल ईरान के पैसों पर पलने वाले आतंकी संगठन जिनको ईरान का “एक्सिस ऑफ रिज़िस्टन्स” कहा जाता है, चाहे वह गाजा पट्टी में हमास हो, यमन में हूती विद्रोही हों, लेबनान में हिज्बुल्ला हों या इराक और सीरिया में शिया मिलिशिया हों, यह सभी सात अक्टूबर 2023 से पहले वैचारिक रूप से इजराइल के विरोधी थे। मगर वे अपने संघर्ष भी कर रहे थे और हमास का समर्थन करने के लिए एकजुट नहीं थे। लेकिन अब, ये सभी संगठन इजराइल को तबाह करने के एक साझा लक्ष्य के तहत काम कर रहे हैं। 

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