Health Tips: Work Life में दिमाग हो रहा Hang? यह Decision Fatigue है, Burnout से पहले पहचानें लक्षण

By अनन्या मिश्रा | May 21, 2026

आज के समय में हम सभी अपने घर-परिवार, करियर और अन्य कारणों के बारे में काफी ज्यादा सोचने लगते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने के समय तक हमारा दिमाग शांत नहीं रह पाता है। दिन भर के कई छोटे-छोटे फैसले जैसे- कहां जाना है, कैसे जाना है, क्या पहनना है, किसके साथ मीटिंग है, खाने में क्या खाना है और किस काम को पहले करना है आदि लेने की वजह से दिमाग काफी थक जाता है।

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जानिए डिसीजन फटीग के लक्षण

एक रिसर्च के मुताबिक डिसीजन फटीग हमारी मानसिक एनर्जी को कम कर देता है। जिसकी वजह से व्यक्ति की विलपॉवर और सही फैसला लेने की क्षमता कम होने लगती है। यह थकान गलत फैसले लेने के लिए मजबूर करती है। इस समस्या के होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।

मानसिक थकान होना

लगातार फैसले लेने के बाद दिमाग में भारीपन महसूस होने लगता है। इस स्थिति में व्यक्ति को सोचने में ज्यादा समय लगता है और साधारण काम को करने में भी मुश्किल होता है।

फैसले टालना

डिसीजन फटीग की वजह से फैसला लेने की ताकत कम हो जाती है। जिस कारण व्यक्ति फैसले टालने लगता है। इस समस्या के होने पर व्यक्ति अभी मन नहीं कर रहा या हर काम को वो बाद में देखेंगे आदि तरह के बहाने बनाने लगता है।

गलत फैसला लेना

कई बार दिमाग पर जोर पड़ने की वजह से हम जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। जैसे बिना सोचे समझे शॉपिंग करना, डाइट पर होने के बाद भी जंक फूड खाना या किसी काम के लिए हां या न करना।

फैसले लेने से बचने की कोशिश

इस समस्या की वजह से फैसला लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसकी वजह से कई लोग अक्सर निर्णय लेने से पूरी तरह से बचने लगते हैं। ऐसे में वह अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर डालने लगते हैं। या फिर अन्य ऑप्शन से दूरी बना लेते हैं।

आत्मविश्वास न होना

डिसीजन फटीग की वजह से खुद को दोष देना, बार-बार अपने फैसलों पर शक होगा या हर फैसले के बाद यह सोचना की सही फैसला लिया या नहीं, यह भी इसका बड़ा संकेत है।

शारीरिक लक्षण

इस समस्या की वजह से व्यक्ति को फोकस करने में मुश्किल, सिर में दर्द, रोजमर्रा के कामों में दिक्कत और नींद में कमी होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

डिसीजन फटीग से कैसे करें बचाव

कोई भी फैसला सुबह के समय लें, क्योंकि इस दौरान मानसिक एनर्जी ज्यादा होती है। इसलिए जरूरी है कि आप सुबह के समय अपने जरूरी फैसले लें।

अपने किसी काम को करने के लिए ज्यादा ऑप्शन न रखें। खाना, कपड़ा या रोजमर्रा के कामों को सीमित ऑप्शन रखने चाहिए, जिससे कि ज्यादा कंफ्यूजन न हो।

आपको अपने लिए एक हेल्दी रूटीन बनाना चाहिए। जिससे कि छोटे फैसले खुद लेने में आराम रहे। आप एक समय पर एक्सरसाइज करें और खुद के लिए तय किया हुआ खाना खाएं।

लगातार काम करने से बचना चाहिए। क्योंकि लगातार काम करने से आप मानसिक तौर पर थक जाते हैं। इसलिए हर 60 से 90 मिनट बाद छोटा ब्रेक लें। 

वहीं हेल्दी डाइट और अच्छी नींद भी आपके मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने और फैसलों को आसान बनाने में सहायता कर सकते हैं।

जानिए कब है ये चिंता का कारण

अगर आपको थकान, चिड़चिड़ापन और कोई भी फैसला लेने में मुश्किल होती है औऱ अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। जिसकी वजह से आपके रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। तो आपको सिर्फ डिसीजन फटीग नहीं बल्कि तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इस स्थिति को आपको हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि डॉक्टर या एक्सपर्ट से भी कंसल्ट करें।

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