By रेनू तिवारी | Aug 15, 2025
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर क्षेत्र का राज्य का दर्जा बहाल करने की उम्मीदें प्रबल हैं, लेकिन आशावाद कम होने के बावजूद संघर्ष जारी रहेगा। राज्य का दर्जा बहाल करने पर उन्होंने कहा, "मेरे शुभचिंतकों ने मुझे बताया था कि स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ बड़ी घोषणा की जाएगी। उम्मीद की किरण धुंधली पड़ रही है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "हमें बताया गया था कि जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों के बराबर लाया जाएगा। आज मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या हम ऐसा कर पा रहे हैं?"
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित किए जाने तक वहां कोई निर्वाचित सरकार नहीं थी। अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। राज्य का पुनर्गठन कर दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद 2018 और 2019 में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर राज्यपाल ने ध्वजारोहण किया, जबकि 2020 से 2024 तक यह जिम्मेदारी उपराज्यपाल ने निभाई।
पिछले साल के अंत में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके बाद उमर अब्दुल्ला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। अब्दुल्ला ने बख्शी स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उन्हें सलामी गारद दी गयी। इसके बाद उन्होंने परेड में भाग लेने वाली टुकड़ियों का निरीक्षण किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों और स्कूली बच्चों के मार्च पास्ट की सलामी ली।
मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल सहयोगियों ने केंद्र शासित प्रदेश की शीतकालीन राजधानी जम्मू और अन्य प्रमुख जिला मुख्यालयों में स्वतंत्रता दिवस समारोहों की अध्यक्षता की। किश्तवाड़ में बृहस्पतिवार को आयी अचानक बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में मुख्यमंत्री ने समारोह का मुख्य आकर्षण माने जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम को रद्द कर दिया।