By एकता | Oct 30, 2026
त्योहारों का मौसम खुशियां और अपनों के साथ समय बिताने का मौका लेकर आता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यही समय अकेलेपन और घर की याद को भी बढ़ा सकता है। खासकर वे लोग जो पढ़ाई, नौकरी या किसी दूसरी वजह से अपने परिवार से दूर रहते हैं, उन्हें त्योहारों के दौरान अपनों की कमी ज्यादा महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अकेलेपन का मतलब सिर्फ शारीरिक रूप से अकेला होना नहीं है। कई बार किसी व्यक्ति के आसपास दोस्त, सहकर्मी और परिचित होते हैं, लेकिन फिर भी वह भावनात्मक रूप से अकेला महसूस कर सकता है। ऐसा तब होता है, जब उसे अपने करीबी लोगों से जुड़ाव महसूस नहीं होता।
मनोचिकित्सक के अनुसार, त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया पर परिवार और दोस्तों की खुशियों भरी तस्वीरें और वीडियो देखने से यह भावना और बढ़ सकती है। व्यक्ति को लग सकता है कि बाकी सभी लोग अपनों के साथ त्योहार मना रहे हैं और वह इस खुशी से दूर है। इस वजह से उदासी, घर की याद, चिड़चिड़ापन और दूसरों से अलग-थलग महसूस करने जैसी भावनाएं पैदा हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान अकेलापन महसूस करना अपने आप में किसी बीमारी का संकेत नहीं है। लेकिन अगर यह भावना लंबे समय तक बनी रहे और नींद, भूख, ध्यान लगाने की क्षमता, काम करने की इच्छा या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कुछ लोग ऐसी भावनाओं से बचने के लिए दूसरों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं, शराब का सेवन बढ़ा देते हैं या लगातार इंटरनेट पर समय बिताने लगते हैं। अगर त्योहार खत्म होने के बाद भी ये परेशानियां बनी रहती हैं, तो इन पर ध्यान देना जरूरी है।
अगर आप त्योहारों के दौरान घर से दूर हैं, तो परिवार और दोस्तों के संपर्क में बने रहना मददगार हो सकता है। इसके लिए परिवार के साथ वीडियो कॉल करने का समय तय करें। दोस्तों के साथ खाना खाएं या उनके साथ त्योहार मनाने की कोशिश करें।
इसके अलावा, अपनी पसंद के छोटे-छोटे रिवाज भी बना सकते हैं। जैसे घर पर कोई खास पकवान बनाना, दीप जलाना या अपनी पसंद की गतिविधि करना। इससे त्योहार के साथ भावनात्मक जुड़ाव बना रह सकता है। विशेषज्ञ का कहना है कि त्योहार होने का मतलब यह नहीं है कि आपको हर समय खुश ही रहना चाहिए। अगर इस दौरान उदासी या अकेलापन महसूस हो रहा है, तो खुद पर खुश रहने का दबाव न डालें।
मनोचिकित्सक के मुताबिक, अकेलेपन को पूरी तरह खत्म करना जरूरी नहीं है। सबसे जरूरी है अपनी भावनाओं को समझना, अपनों से जुड़े रहना और जहां भी हैं, वहां अच्छे अनुभव बनाने की कोशिश करना। घर से दूर रहकर भी अपनापन महसूस किया जा सकता है। इसके लिए परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क बनाए रखना और अपनी पसंद से त्योहार मनाना मददगार हो सकता है।