By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 23, 2026
‘गोओओओओल......’ यह गूंजता हुआ नारा प्लास्टिक की मेजों पर रखे एक टेलीविजन के सामने जुटी भीड़ के बीच बार-बार सुनाई देता है। इसकी गूंज मेक्सिको सिटी के व्यस्त श्रमिक वर्ग वाले इलाके की गलियों और दुकानों तक दूर-दूर तक फैल जाती है। मेक्सिको में फुटबॉल प्रशंसक खुले मैदानों, पुलों के नीचे बने स्थानों और मशहूर स्थानीय व्यंजन टैको की दुकानों में लगे टीवी स्क्रीन पर निगाहें टिकाए अपनी राष्ट्रीय टीम का पूरे जोश और जुनून के साथ समर्थन कर रहे हैं। फीफा विश्व कप में जैसे ही मेक्सिको की टीम एक और मैच जीतती है, पूरे देश में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ जाती है। अमेरिका और कनाडा के साथ मिलकर अपने देश में आयोजित हो रहे इस विश्व कप के महंगे टिकट खरीद पाना मेक्सिको के अधिकांश लोगों लिए संभव नहीं है।
मेक्सिको में एक औसत कर्मचारी की मासिक आय लगभग 433 डॉलर है और फुटबॉल को ऐसा खेल माना जाता है जो अमीर-गरीब सभी को जोड़ता है। ऐसे में मैच देखने वालों और उससे वंचित रह जाने वालों के बीच का अंतर साफ दिखाई दे रहा है। ऑक्सफैम मेक्सिको के वित्तीय समन्वयक डिएगो मेरला का कहना है कि इससे सामाजिक असंतोष बढ़ा है और कई लोगों को लग रहा है कि ‘यह एक ऐसा जश्न वाला आयोजन है जिसमें हमें बुलाया ही नहीं गया।’ मेरला ने कहा, “विश्व कप को अधिकतम कमाई के नजरिये से संचालित किया जा रहा है।
कोशिश यही है कि जो लोग सबसे ज्यादा कीमत चुका सकते हैं, उनसे अधिक से अधिक पैसा लिया जाए। इसका नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में लोग इससे बाहर हो गये है।’’ इस वर्ष की शुरुआत में टिकटों की कीमत 140 डॉलर से लेकर 8,680 डॉलर तक थी, लेकिन बाद में इनमें भारी बढ़ोतरी हुई। विश्व कप फाइनल के कुछ टिकटों की कीमत लगभग 32,970 डॉलर तक पहुंच गई। आलोचनाओं के बीच फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने इन ऊंची कीमतों का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह अमेरिका के बाजार के अनुरूप है।
गुइलेर्मो रामीरेज (49 वर्ष) के लिए इसका समाधान था कि लोग अपना उत्सव खुद आयोजित करें। रामीरेज मेक्सिको सिटी के श्रमिक वर्ग वाले इलाके तेपितो के निवासी हैं। यह इलाका विश्व कप की नकली जर्सियों और सड़क किनारे लगने वाले बाजारों के लिए जाना जाता है। यहां फुटबॉल केवल एक खेल नहीं बल्कि स्थानीय पहचान और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इलाके के बीचोंबीच दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी बेर्नार्दो ‘मानोलेते’ एर्नांदेज के नाम पर एक फुटबॉल मैदान भी है, जिनका जन्म इसी इलाके में हुआ था।
दक्षिण कोरिया के खिलाफ मेक्सिको के मैच से पहले रामीरेज ने अपने घर और छोटी दुकान के सामने दो प्लास्टिक मेजों पर टीवी स्क्रीन और स्पीकर लगा दिए। हरे और सफेद रंग की मेक्सिको जर्सी पहने रामीरेज को 1986 का विश्व कप याद है, जब उन्होंने पड़ोसी के टेलीविजन पर विश्व कप देखा था।
रामीरेज ने कहा, ‘‘हममें से बहुत से लोग स्टेडियम जाने का खर्च नहीं उठा सकते। यह फुटबॉल प्रशंसकों का इलाका है। जब भी मैच होता है, लोग अपने टीवी बाहर निकाल लेते हैं, खासकर विश्व कप के दौरान ऐसा हर जगह होता है।” मैच के दौरान उनके टीवी के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुट जाते हैं। कुछ लोग हरे और लाल रंग के लुचा लीब्रे मुखौटे पहने होते हैं, कुछ अपने बच्चों को गोद में लिए खड़े रहते हैं और कई लोग उनकी दुकान से बीयर खरीदकर मैच का आनंद लेते हैं। जब मेक्सिको जीतता है तो रामीरेज के पड़ोसी ही नहीं, बल्कि पूरी मेक्सिको सिटी खुशी से झूम उठती है। हजारों लोग सड़कों पर निकल आते हैं और शहर के प्रसिद्ध स्मारक ‘एंजेल दे ला इंडिपेन्डेन्सिया’ की ओर उमड़ पड़ते हैं।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने भी टिकटों की ऊंची कीमतों की आलोचना की है। पिछले सप्ताह उन्होंने कहा कि फीफा नेतृत्व को अपनी मूल्य निर्धारण नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “फुटबॉल केवल कारोबार नहीं होना चाहिए, यह उससे कहीं अधिक है।” शीनबाउम ने लोगों से आग्रह किया है कि वे मेक्सिको सिटी, ग्वाडालाहारा और मोंटेरे में स्थानीय प्रशासन और फीफा द्वारा आयोजित मुफ्त सार्वजनिक स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में शामिल हों।
केवल मेक्सिको सिटी में ही ऐसे लगभग 20 स्थान बनाए गए हैं, जिनमें कम आय वाले इलाकों को भी शामिल किया गया है। मैच के दौरान शहर के मुख्य चौक ‘जोकालो’ में दो लाख से अधिक स्थानीय और विदेशी प्रशंसक जुटे। मेक्सिको की जर्सियों से भरी भीड़ पूरे उत्साह में डूबी दिखाई दी।