By Ankit Jaiswal | Jun 12, 2026
मुकाबले में तीन खिलाड़ियों को मैदान से बाहर भेजा गया। ऐसे में चर्चा इस बात की भी होने लगी है कि क्या यह विश्व कप असामान्य रूप से आक्रामक और विवादों से भरा रहने वाला है।
गौरतलब है कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर एक ही मुकाबले में तीन खिलाड़ियों का बाहर होना बेहद दुर्लभ माना जाता है। यही कारण है कि पहले ही मैच के बाद प्रतियोगिता की अनुशासन व्यवस्था और खिलाड़ियों के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार याया सिथोले को मुकाबले के 50वें मिनट में ब्रायन गुटियरेज के खिलाफ गंभीर फाउल करने पर लाल कार्ड दिखाया गया। इस फैसले पर अधिक विवाद नहीं हुआ और अधिकांश विशेषज्ञों ने इसे सही निर्णय माना। हालांकि थेम्बा ज्वाने को लेकर विवाद पैदा हो गया। उन्हें 84वें मिनट में रोबर्टो अलवाराडो के खिलाफ हिंसक व्यवहार का दोषी मानते हुए मैदान से बाहर भेजा गया। यह फैसला वीडियो समीक्षा के बाद लिया गया था।
दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस ने इस निर्णय पर खुलकर असहमति जताई। उनका कहना था कि दूसरा लाल कार्ड बेहद सख्त फैसला था। उनके अनुसार मेक्सिको के खिलाड़ी ने पहले रास्ता रोका था और उस स्थिति में लाल कार्ड दिखाना उचित नहीं था। हालांकि उन्होंने याया सिथोले के खिलाफ लिए गए निर्णय को सही माना।
उधर मेक्सिको के सेसर मोंटेस को अतिरिक्त समय में तब बाहर भेजा गया, जब उन्होंने गोल की ओर बढ़ रहे खुलिसो मुदाउ को दंड क्षेत्र के ठीक बाहर रोक दिया। रेफरी ने इसे स्पष्ट गोल अवसर रोकने का मामला माना और सीधे लाल कार्ड दिखा दिया।
बता दें कि यह विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है, जिसमें 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। ऐसे में यदि शुरुआती मुकाबलों में ही इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती हैं, तो आगे चलकर अनुशासन से जुड़े रिकॉर्ड भी टूट सकते हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में कतर में आयोजित विश्व कप के पूरे टूर्नामेंट में केवल चार लाल कार्ड दिखाए गए थे। वहीं वर्ष 2018 में रूस में हुए विश्व कप में भी कुल चार खिलाड़ियों को मैदान से बाहर भेजा गया था। इसके विपरीत इस बार पहले ही मुकाबले में तीन लाल कार्ड देखने को मिले हैं।
विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक लाल कार्ड का रिकॉर्ड वर्ष 2006 के जर्मनी विश्व कप के नाम दर्ज है। उस संस्करण में कुल 28 खिलाड़ियों को लाल कार्ड दिखाया गया था। उसी प्रतियोगिता के फाइनल में फ्रांस के महान खिलाड़ी जिनेदिन जिदान ने इटली के मार्को मातेरात्सी को सिर मार दिया था, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था। यह घटना आज भी विश्व फुटबॉल के सबसे चर्चित विवादों में गिनी जाती है।
फिलहाल विश्व कप 2026 की शुरुआत ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस बार मुकाबले बेहद तीखे और प्रतिस्पर्धी रहने वाले हैं।