By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 10, 2026
फेडरेशन ऑफ़ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज़ (फिमी) ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति में रुकावट की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय एल्युमीनियम की कीमतें 3,400 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे भारत के प्राथमिक उत्पादकों को तो कम समय के लिए फ़ायदा हो रहा है, लेकिन आदान लागत बढ़ने से उन्हें लंबे समय की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में स्थित कुछ एल्युमीनियम स्मेल्टर, जैसे कि अल्बा (एएलबीए), ने अपरिहार्य स्थिति घोषित कर दी है और अस्थायी रूप से खेप रोक दी है। जबकि कतर में स्थित कतालम स्मेल्टर ने सीमित समय के लिए बंद घोषित कर दिया है।
नाल्को, हिंडाल्को और वेदांता जैसी कंपनियां, जो सालाना 40 लाख टन से ज़्यादा एल्युमीनियम का उत्पादन करती हैं, सीपीसी के आयात के लिए काफ़ी हद तक अमेरिका और पश्चिम एशिया पर निर्भर रहती हैं। इससे वे आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। फिमी ने चेतावनी दी कि अगर यह संकट और एल्युमीनियम की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं, तो इससे बुनियादी ढांचा, बिजली, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और वाहन जैसे क्षेत्रों के लिए आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अधिकारी ने आगे बताया कि इस उद्योग संगठन ने मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार से कुछ उपाय करने की अपील की है, जैसे कि आयात के स्रोतों में विविधता लाना और कच्चे माल पर आयात शुल्क में कमी करना।
वेदांता अपने एल्युमीनियम कारोबार का विस्तार करने के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस निवेश में ओडिशा के झारसुगुड़ा में मूल्य-वर्धित क्षमता का विस्तार, छत्तीसगढ़ में बाल्को स्मेल्टर का विस्तार और लांजीगढ़ में चल रहे क्षमता विस्तार का काम शामिल है। नाल्को ने अगले पांच साल में एक नया एल्युमीनियम स्मेल्टर और कोयले पर आधारित एक बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। इसमें से 18,000 करोड़ रुपये स्मेल्टर के लिए रखे गए हैं, और 12,000 करोड़ रुपये ताप बिजली संयंत्र पर खर्च किए जाएंगे।