By अनन्या मिश्रा | Feb 05, 2026
कुत्ते का काटना एक ऐसी स्थिति होती है, जिसको लापरवाही में लेना जानलेवा बन सकता है। भारत में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और चौंकाने वाली बात यह है कि रेबीज वायरस होने के बाद इसका कोई सटीक इलाज नहीं है। बचाव ही इस घातक बीमारी का एकमात्र रास्ता है। जब कुत्ता काटता है, तो उसकी लार में मौजूद खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया घाव के माध्यम से हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।
ऐसी घटना होने पर अक्सर लोग घबराहट में घाव पर पट्टी बांध देते हैं। या फिर घाव पर तेल, हल्दी या फिर मिर्च आदि लगाने लगते हैं। जोकि संक्रमण को शरीर के अंदर और गहराई तक धकेलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कुत्ते के काटने पर क्या करना चाहिए।
कुत्ते के काटने के फौरन बाद सबसे जरूरी है कि घाव को बहते हुए पानी और साबुन से करीब कम से कम 10 से 15 मिनट तक धुलें। साबुन में मौजूद तत्व वायरस की बाहरी परत को नष्ट करने में सहायता करते हैं। घाव को रगड़ने की गलती न करें और न ही उस पर पट्टी बांधे। क्योंकि घाव का खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना वायरस को धीमा कर देता है। वहीं सफाई के बाद किसी एंटीसेप्टिक लोशन का इस्तेमाल करें और फौरन डॉक्टर के पास जाएं।
घाव पर चूना, लाल मिर्च, तेल, मिट्टी या फिर हल्दी लगाने जैसा देसी इलाज करना सबसे बड़ी गलती है। यह चीजें वायरस को खत्म करने की बजाय घाव में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
अक्सर लोग सोचते हैं कि पालतू कुत्ते ने काटा है, तो वैक्सीन की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसा करना जानलेवा भूल है। कुत्ता पालतू हो या आवारा, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीन जरूरी है।
कुत्ते के काटने के फौरन बाद टीका न लगवाने से वायरस पूरे शरीर में फैलने और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने का मौका देता है। एक्सपर्ट की मानें, तो कुत्ते के काटने के 24 घंटे के अंदर वैक्सीन लगवाना चाहिए।
कुछ लोग एक-दो वैक्सीन लगवाकर कोर्स को छोड़ देते हैं। इस कोर्स को पूरा न करने से शरीर में वायरस के खिलाफ पूरी प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती है।
घाव पर फौरन पट्टी बांधने या फिर टांके लगवाने से वायरस अंदर ही दब जाता है। रेबीज का घाव खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना जरूरी है।
अगर आपको रेबीज के लक्षण दिखने शुरू हो जाएं, तो फिर मृत्यु की संभावना करीब 100% हो जाती है, क्योंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, इसका सिर्फ बचाव है।
बता दें कि हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर घाव की गंभीरता के आधार पर फौरन 'एंटी-रेबीज वैक्सीन' शुरू करते हैं। अगर घाव गहरा होता है, तो 'रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन' का इंजेक्शन घाव के आसपास दिया जाता है। जिससे कि वायरस को जल्दी बेअसर किया जा सके। वहीं साथ ही टिटनेस का भी इंजेक्शन भी लगाया जाता है। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना वैक्सीन की कोई भी डोज छोड़ने की गलती नहीं करनी चाहिए।
कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। सही समय पर की गई सफाई और टीकाकरण रेबीज को 100% रोक सकते हैं। इसलिए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए प्राथमिक चिकित्सा के इन नियमों को याद रखें। आवारा कुत्तों से दूरी बनाएं और नियमित रूप से पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराना चाहिए। क्योंकि आपकी सतर्कता ही आपको और समाज को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकती है।