Dadabhai Naoroji Birth Anniversary: ब्रिटिश संसद में पहुंचने वाले पहले भारतीय थे दादाभाई नौरोजी, 3 बार बने कांग्रेस के अध्यक्ष

By अनन्या मिश्रा | Sep 04, 2025

ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया के नाम से लोकप्रिय दादाभाई नौरोजी का 04 सितंबर को जन्म हुआ था। दादाभाई नौरोजी का योगदान सिर्फ स्वतंत्रता तक ही सीमित नहीं रहा। दादाभाई नौरोजी ने शिक्षाविद, समाज सुधारक, राजनेता, पत्रकार और ब्रिटिश भारत के अनौपचारिक राजदूत के रूप में भी उल्लेखनीय भूमिका निभायी थी। वह एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में उभरे, जिन्होंने अनेक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई और उनको प्रथम भारतीय होने का सम्मान मिला था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर दादाभाई नौरोजी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

एक साधारण पारसी परिवार में 04 सितंबर 1825 को दादाभाई नौरोजी का जन्म हुआ था। इनके पिता नाम नौरोजी प्लांजी डोरडी और मां का नाम मनेखबाई था। जब वह 4 साल के थे, तो उनके पिता का निधन हो गया था। ऐसे में उनकी मां ने दादाभाई नौरोजी का पालन-पोषण किया था। वह अंग्रेजी और गणित में काफी अच्छे थे। वहीं 11 साल की उम्र में उनकी शादी गुलबाई से हुई थी। वहीं 27 वर्ष की उम्र में दादाभाई नौरोजी गणित और प्राकृतिक दर्शन के प्राध्यापक बन गए थे। दादाभाई को साल 1859 में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में गुजराती का प्रोफेसर नियुक्त किया गया था।

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ब्रिटिश पार्लियामेंट में चुने गए सांसद 

साल 1892 में उन्होंने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स का चुनाव लड़ा था। फिर लिबरल पार्टी ने फिनस्बरी सेंट्रल सीट से टिकट देकर नौरोजी को मैदान में उतारा। इस इलाके में कामकाजी और श्रमिक लोगों की संख्या अधिक थी। इस तरह से 5 हजार वोटों से चुनाव जीतकर दादाभाई नौरोजी ने ब्रिटिश पार्लियामेंट में एंट्री की। सांसद बनने के बाद उनको दादाभाई नैरो मेजोरिटी कहा जाने लगा। वह ब्रिटिश संसद में पहुंचने वाले पहले भारतीय थे।


लंदन में रखी इंडियन एसोसिएशन की नींव

साल 1853 में दादाभाई नौरोजी ने मुंबई एसोसिएशन की स्थापना की थी। फिर साल 1866 में लंदन में इंडियन एसोसिएशन की नींव रखी। फिर साल 1867 में लंदन में ही उन्होंने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की। इसका उद्देश्य ब्रिटिश जनता को भारत की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना था।


कांग्रेस अध्यक्ष

बता दें कि दादाभाई नौरोजी कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। दादाभाई नौरोजी ने 3 बार कांग्रेस की अध्यक्षता की थी। साल 1886 में उन्होंने पहली कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। वहीं साल 1893 में दूसरी बार कांग्रेस के 9वें अधिवेशन के अध्यक्ष रहे। फिर साल 1906 में तीसरी बार वह कांग्रेस के 22वें अधिवेशन के अध्यक्ष बने थे। जिसमें उन्होंने स्वराज की मांग को प्रमुखता से उठाया था, जोकि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए मील का पत्थर साबित हुई।


मृत्यु

वहीं 30 जून 1917 को 91 साल की उम्र में दादाभाई नौरोजी ने इस दुनिया को अलविदा कहा था।

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