By अभिनय आकाश | Mar 25, 2026
सागर में कार में लगी आग को पहले एक दर्दनाक हादसा समझा गया। लेकिन जब पुलिस ने इस घटना की गहराई से जांच की तो सामने आया एक ऐसा सच जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। यह सिर्फ आग नहीं थी। यह एक सोची समझी साजिश थी जिसमें पति ने ही अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। इश्क, शक और धोखे की इस कहानी ने एक परिवार को उजाड़ दिया और समाज को झकझोर कर रख दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी डॉक्टर नीलेश और उसकी पत्नी सीमा के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि डॉक्टर का पड़ोस की एक युवती से प्रेम प्रसंग था जिसे लेकर घर में अक्सर झगड़े होते थे। 20 मार्च की रात भी दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ जो इतना बढ़ गया कि गुस्से में डॉक्टर ने अपनी पत्नी का गला घोट दिया।
आरोप है कि आग लगने के बाद डॉक्टर और उसके दोनों साथी कार से बाहर निकल आए। लेकिन उन्होंने सीमा को बचाने की कोई कोशिश नहीं की। वह लोग कार को जलते हुए देख रहे थे और घटना को एक्सीडेंट या गैस ब्लास्ट बताने की कोशिश करते रहे। लेकिन पुलिस को मौके पर मिले सबूतों और घटना स्थल की परिस्थितियों ने उनकी कहानी पर सवाल खड़े कर दिए। यहीं से जांच का रुख बदल गया और साजिश के परते खुलने लगे। मृतिका के भाई का कहना है कि जीजा और दीदी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था और उन्हें पहले से ही किसी अनहोनी का डर था। पुलिस पूछताछ में आरोपी डॉक्टर की चालाकी भी सामने आई। बताया जा रहा है कि वह पहले बीएसएफ की ट्रेनिंग ले चुका है और काफी समय तक पुलिस को गुमराह करता रहा। कभी उसने एक्सीडेंट की कहानी बताई तो कभी सीएनजी ब्लास्ट का बहाना बना। लेकिन वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने उसकी हर कहानी को झूठ साबित कर दिया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी डॉक्टर और उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है। एक प्रेम प्रसंग और घरेलू विवाद ने एक महिला की जिंदगी छीन ली और एक परिवार को हमेशा के लिए टूटने पर मजबूर कर दिया।
सागर में एक डॉक्टर ने पत्नी की हत्या की साजिश रची और 2-2 लाख रुपए का लालच देकर अपने दो किरायेदारों को शामिल किया। पत्नी को कार में जलाकर देखता रहा। फिर वारदात को हादसा साबित करने की कोशिश की, लेकिन अपनी ही कहानी में फंस गया। पुलिस ने मामले का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी डॉ. नीलेश और उसके दो सहयोगियों रामकृष्ण और शुभम को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में सामने आया कि जिस मकान में डॉक्टर रहता था, उसी में दोनों सह-आरोपी रामकृष्ण और शुभम कुर्मी किराए से रहते थे। रामकृष्ण और शुभम गढ़ाकोटा में पैथोलॉजी लैब चलाते थे और डॉक्टर नीलेश के क्लिनिक से सैंपल लाते थे।