पांच दशक बाद काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव ने छोड़ा कलेवर, जानिए क्या है मान्यता

By आरती पांडेय | May 26, 2021

आज वाराणसी स्थित बाबा काल भैरव मंदिर में एक अचंभित घटना हुई। बाबा अचानक से अपना कलेवर छोड़ने लगे। मान्यता है कि बाबा का कलेवर यानी चोला तब छूटता है, जब पृथ्वी पर आने वाले किसी बड़े संकट को बाबा खुद पर ले लेते हैं। ऐसी ही दुर्लभ घटना 1971 में भी हुई थी। उसके बाद आज 2021 में ऐसा हुआ है। हालांकि, 14 वर्ष पूर्व यानी 2007 में भी कलेवर का कुछ अंश टूटकर गिरा था।

 इसके बाद गंगा में कलेवर को विसर्जन किया गया उसके बाद पूजा पाठ करके दर्शन के लिए कपाट खोला गया।

पारम्परिक अंदाज में निकाली गयी शोभायात्रा

इस दुर्लभ दुर्घटना के बाद मंदिर के महंत की अगुवाई में गांजे-बाजे और डमरू की आवाज के बीच शोभायात्रा निकाली गई। फिर गंगा में कलेवर को विसर्जित किया गया। 1971 में भी ऐसे ही कलेवर का विसर्जन किया गया था।

पूजा पाठ करके दर्शन के लिए कपाट खोला

मंदिर के महंत नवीन गिरी ने बताया कि इस दुर्लभ दुर्घटना के बाद मोम और सिंदूर से बाबा का लेप किया गया। उसके बाद उनकी आरती की गई और फिर से भक्तों के लिए मंदिर को खोल दिया गया है।

प्रमुख खबरें

Bengaluru की Startup Pronto पर बड़ा आरोप, AI Training के लिए घरों में हो रही Video Recording?

USA में भारतीय सेना का जलवा, Gulveer Singh ने National Record तोड़कर जीता सिल्वर मेडल

Harry Kane की हैट्रिक ने दिलाई Bayern Munich को डबल ट्रॉफी, एक सीजन में दागे रिकॉर्ड 61 गोल।

IPL 2026 Playoffs की तस्वीर साफ, Rajasthan की एंट्री के साथ ये Top-4 टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी