By नीरज कुमार दुबे | Apr 21, 2026
हैदराबाद से हुब्बल्ली जा रही एक विमान सेवा में सवार यात्रियों के लिए एक भयावह अनुभव सामने आया, जब उनका विमान हवा में ही लगभग दो घंटे तक चक्कर लगाता रहा और अंततः निर्धारित गंतव्य पर उतरने की बजाय उसे दूसरे शहर की ओर मोड़ना पड़ा। यह घटना 19 अप्रैल को हुई और इसने विमानन सुरक्षा तथा यात्रियों की मानसिक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। हम आपको बता दें कि यह विमान हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोपहर लगभग तीन बजकर चौदह मिनट पर उड़ा था और इसे शाम चार बजकर तीस मिनट तक हुब्बल्ली पहुंचना था। यह हवाई मार्ग केवल दो दिन पहले यानि सत्रह अप्रैल को ही शुरू किया गया था, इसलिए इस उड़ान में कई यात्री पहली बार इस मार्ग से यात्रा कर रहे थे। विमान में कुल बाइस यात्री सवार थे।
यात्रियों द्वारा बनाए गए कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें लोग रोते और प्रार्थना करते हुए नजर आ रहे हैं। एक महिला हाथ जोड़कर भगवान से अपने और अपने बच्चों की सुरक्षा की गुहार लगाती हुई सुनाई देती है, जबकि एक अन्य यात्री यह कहते हुए दिखता है कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा और वह बस सुरक्षित उतरना चाहता है। इन दृश्यों ने इस घटना की गंभीरता को और अधिक उजागर कर दिया है।
प्रारंभिक जानकारी में यह आशंका जताई गई थी कि विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी, क्योंकि इतने लंबे समय तक हवा में चक्कर लगाना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। हालांकि, विमान सेवा कंपनी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी स्थिति केवल खराब मौसम के कारण उत्पन्न हुई थी और इसमें किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं थी।
कंपनी के अनुसार, पायलट ने खराब मौसम के बारे में तीन बार घोषणा की थी और यात्रियों को स्थिति से अवगत कराया गया था। कंपनी का यह भी कहना है कि हुब्बल्ली क्षेत्र में मौसम अचानक बिगड़ गया था, जिसके कारण विमान को सुरक्षित रूप से उतारना संभव नहीं था। ऐसे में मानक प्रक्रिया के तहत विमान को पहले कुछ समय तक हवा में रोका गया और फिर स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे बेंगलुरु के केम्पेगौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया।
विमान शाम करीब छह बजकर पैंतालीस मिनट पर बेंगलुरु में सुरक्षित उतरा। इसके बाद स्थिति सामान्य होने पर उसे फिर से हुब्बल्ली के लिए रवाना किया गया। बाद में विमान अपने मूल स्थान हैदराबाद लौट गया। विमान सेवा के प्रवक्ता ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया गया और यह सब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित है और कंपनी का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहद अच्छा रहा है।
बहरहाल, देखा जाये तो इस घटना ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि खराब मौसम जैसी परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसी स्थितियों में यात्रियों को मानसिक रूप से तैयार रखने के लिए बेहतर संवाद और जानकारी दी जाए, ताकि भय और अफवाहों को कम किया जा सके। साथ ही, यात्रियों को भी यह समझना होगा कि हर असामान्य स्थिति का अर्थ खतरा नहीं होता, बल्कि अक्सर यह सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम होता है।