By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 20, 2026
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से लागत पर दबाव बढ़ने के बावजूद देश की प्रमुख एफएमसीजी (रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली) कंपनियां त्योहारी सीजन के दौरान अपने उत्पादों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने से बच सकती हैं। कंपनियों का जोर फिलहाल उपभोक्ता मांग और बिक्री की मात्रा बनाए रखने पर है। उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियां जून तिमाही में ही लागत बढ़ने के असर को कम करने के लिए चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में करीब दो से पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर चुकी हैं।
हालांकि, कंपनियां लागत नियंत्रण, परिचालन दक्षता और उत्पाद पोर्टफोलियो में बदलाव के जरिये बढ़ी हुई लागत का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही हैं। इससे उनके मुनाफे पर दबाव बना हुआ है, लेकिन कंपनियां फिलहाल कीमत बढ़ाने के बजाय बिक्री की मात्रा में वृद्धि पर ध्यान दे रही हैं। आईटीसी के खाद्य प्रभाग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और कार्यकारी निदेशक हेमंत मलिक ने कहा कि कंपनी त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश करेगी।
उन्होंने कहा कि लागत प्रबंधन और पोर्टफोलियो से जुड़े कदमों के जरिये कंपनी बढ़ती जिंस कीमतों के असर को कम करने का प्रयास कर रही है। मलिक के मुताबिक, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी के बाद कई उपभोक्ता उत्पाद श्रेणियों में मांग और बिक्री की मात्रा में तेजी देखने को मिली है। हालांकि, यदि लागत का दबाव आगे भी बना रहता है तो वित्त वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में कीमतों में कुछ संशोधन पर विचार करना पड़ सकता है।
डाबर इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अंकुश जैन ने कहा कि कंपनी ने भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी लागत के असर को कम करने के लिए पिछले कुछ माह में उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी परिस्थितियों पर नजर रखेगी और प्रतिस्पर्धी माहौल को ध्यान में रखते हुए फैसले करेगी। वहीं, पारले प्रोडक्ट्स के मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) मयंक शाह ने कहा कि ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियां फिलहाल कीमतें बढ़ाने के बजाय उन्हें स्थिर रखना पसंद करेंगी।
उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग उत्साहजनक बनी हुई है और कंपनियां त्योहारी मौसम में मांग की इस गति को बनाए रखना चाहती हैं। शाह के अनुसार, कम से कम दिवाली तक एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। कुछ सरकारी उपायों के कारण चीनी जैसी कुछ प्रमुख जिंस की कीमतों में नरमी से भी कंपनियों को राहत मिली है।
कुल मिलाकर, एफएमसीजी कंपनियों की मौजूदा रणनीति लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को यथासंभव स्थिर रखने और बिक्री की मात्रा बढ़ाने की है। हालांकि, यदि कच्चे माल की कीमतों का दबाव आने वाले महीनों में भी जारी रहता है, तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कंपनियां दोबारा कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकती हैं।