By अभिनय आकाश | Mar 10, 2026
ईरान, इजराइल जंग की आड़ में चीन ने रूस को बुरी तरह से दबोच लिया है। अगर आप बम, धमाकों और मिसाइल हमलों को ही जंग मानते हैं, तो चीन ने रूस के साथ जो किया है, उसे देखकर आपको जंग की नई परिभाषा याद करनी होगी। भारत कई बार रूस को चेतावनी दे चुका है। लेकिन रूस इस कदर चीन के जाल में फंस गया था कि होश उड़ा देने वाला खेल हो गया है। बार-बार गले मिलने वाला हमेशा पीठ पर ही वार करता है। चीन ने रूस के साथ वही कर दिया है। दरअसल चीन ने रूस की जड़े तो उसी समय काटनी शुरू कर दी थी जिस समय यूक्रेन जंग शुरू हुई थी। लेकिन पिछले तीन-चार महीनों में चीन ने रूस को घेरने की रफ्तार बढ़ा दी। इसी कड़ी में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सुरक्षा एजेंसी एफएसबी ने चीन से जुड़ा एक दस्तावेज तैयार किया है। इस दस्तावेज में बताया गया है कि रूस और चीन की खुफिया एजेंसियों के बीच छिपी हुई जंग शुरू हो चुकी है।
आपको बता दें कि व्लादीक रूस का वो इलाका है जहां से एक कॉरिडोर बनाया गया है जो सीधे भारत के चेन्नई तक जुड़ रहा है। इस कॉरिडोर को व्लादीक चेन्नई कॉरिडोर कहा जाता है। आने वाले महीनों में रूस इसी कॉरिडोर के जरिए भारत को तेल और दूसरा सामान भेजने वाला था। लेकिन उससे पहले ही चीन ने इस इलाके पर दावा ठोक दिया है। आपको बता दें कि 2016 में पीएम मोदी पुतिन के साथ व्लादी स्टोक गए थे। उस समय भी रूस ने भारत को अपने इस डर के बारे में बताया था। रूस चाहता था कि व्लादीक में भारत की इन्वेस्टमेंट और हिस्सेदारी बढ़ जाए ताकि चीन इस इलाके पर कब्जा ना कर पाए। बहरहाल अब चीन के राष्ट्रवादी लोगों ने कहा है कि हमें रूस से यह इलाके छीनने होंगे। रूस के दक्षिणी इलाके पर चीन ने कैसा हमला किया है। पहली बार खुलासा हुआ है कि चीन ने सेंट्रल एशियाई देशों में ऐसी घुसपैठ की है जिसने मॉस्को को हिला दिया है।
कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे कजाकिस्तान, किरगिस्तान, ताजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान में चीन ने रूस को पूरी तरह से धकेल दिया है। यह देश कभी रूस के पक्के दोस्त हुआ करते थे। रूस इस इलाके में वीटो पावर रखता था। मगर चीन ने यहां पर पूरा समीकरण बदल दिया है। रूस को उखाड़ फेंक चीन सेंट्रल एशिया में अब आर्थिक महाशक्ति बन गया है। चीन अपने हिसाब से यहां पर नियम और शर्तें तय कर रहा है। चीन इस इलाके में लॉजिस्टिक ऊर्जा, सप्लाई चेन, फाइनेंस और डिजिटल गवर्नेंस के अहम नेटवर्क सिस्टम्स को कंट्रोल कर रहा है। हैरानी की बात देखिए कि रूस सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा क्योंकि रूस भी अब आर्थिक रूप से चीन पर इतना ज्यादा निर्भर हो चुका है कि वह सेंट्रल एशिया में चीन की मनमानी को रोकने की स्थिति तक में नहीं है। रूस अगर समय रहते ही चीन से दूर नहीं होता तो आने वाले समय में उसके लिए बहुत बुरा होने वाला है।