भाजपा के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी का निधन, कभी जूताकांड की वजह से चर्चा में आए थे

By अंकित सिंह | Jul 01, 2021

संत कबीर नगर से भाजपा के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी का गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वह 49 वर्ष के थे। उनका निधन उन्होंने बुधवार रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी समय से बीमार थे। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों और उनके समर्थकों में शोक की लहर है। त्रिपाठी को लि‍वर सिरोसिस बीमारी के कारण कुछ दिन पहले मेदांता में भर्ती कराया गया था। त्रिपाठी के रिश्तेदार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने बताया कि पूर्व सांसद के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे हैं। त्रिपाठी वर्ष 2014 में संत कबीर नगर सीट से भाजपा के सांसद चुने गए थे। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने त्रिपाठी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘‘शरद त्रिपाठी के असामयिक निधन ने मुझे और कई अन्य लोगों को दुखी कर दिया है। उन्हें समाज की सेवा करना और गरीबों के लिए काम करना पसंद था। संत कबीर दास के आदर्शों को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्होंने कई अनूठे काम किए। उनके परिजनों और समर्थकों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’’ गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि त्रिपाठी बेहद कर्मठ नेता थे और उन्होंने हमेशा जनता के हितों के मुद्दों को उठाया। उनका असामयिक निधन भाजपा परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने भी त्रिपाठी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि त्रिपाठी का निधन उत्तर प्रदेश और भाजपा के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने शोक संदेश में कहा कि संत कबीर नगर के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी के असामयिक निधन की खबर बेहद दुखदाई है। भगवान राम उनके परिवार को दुख की घड़ी सहन करने की क्षमता दे।

जूताकांड की वजह से चर्चा में रहे 

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मेहदावल सीट से भाजपा विधायक राकेश सिंह से मारपीट प्रकरण से सुर्खियों में आए थे। दरअसल कलेक्ट्रेट सभागार में तत्कालीन सांसद और विधायक के बीच मारपीट हुई थी। उस समय यह मामला काफी उबाल मार रहा था। चूंकी मामला चुनाव से पहले हुआ था ऐसे में भाजपा पर भी सवाल उठाए जा रहे थे। मीडिया की सुर्खियों में रहा था। यहीं कारण रहा था कि शरद त्रिपाठी को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया गया था। उनकी जगह संत कबीर नगर से प्रवीण निषाद को चुनाव में उतारा गया। विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला हाईकोर्ट में चला गया। लंबी जद्दोजहद के बाद हाईकोर्ट से दोनों को राहत मिल गई। कोर्ट ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को खत्म किया। दोनों नेताओं के खिलाफ जारी वारंट को भी निरस्त कर दिया गया।

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