By Ankit Jaiswal | Apr 07, 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे पर राहत देने की तैयारी में नजर आ रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार जल्द ही करीब ढाई लाख करोड़ रुपये की कर्ज गारंटी योजना शुरू कर सकती है, जिसका उद्देश्य संकट से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों को सहारा देना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत कारोबारियों को मिलने वाले कर्ज पर करीब 90 प्रतिशत तक सरकारी गारंटी दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि अगर कोई कर्ज लेने वाला भुगतान करने में असफल रहता है तो बैंक या वित्तीय संस्था को होने वाले नुकसान का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा और वे ज्यादा आसानी से कर्ज देने के लिए तैयार होंगे।
गौरतलब है कि इस योजना की अवधि लगभग चार साल तक रखी जा सकती है और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए एक निश्चित सीमा तक गारंटी कवर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा गया है और आने वाले दिनों में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि इस बार योजना का दायरा पहले से ज्यादा व्यापक रखा जाएगा। इसमें छोटे और मझोले उद्योगों के साथ-साथ विमानन क्षेत्र और अन्य ऐसे कारोबार भी शामिल होंगे जो मौजूदा हालात में नकदी की कमी से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से विमानन क्षेत्र पर पश्चिम एशिया के संकट का सीधा असर पड़ा है, जिससे उड़ान मार्ग, लागत और संचालन प्रभावित हुए हैं।
बता दें कि पहले लागू योजना के तहत कर्ज लेने के लिए अतिरिक्त गारंटी या संपार्श्विक की जरूरत नहीं होती थी और ब्याज दरों पर भी सीमा तय की गई थी, ताकि कारोबारियों को सस्ती दर पर कर्ज मिल सके। इसके साथ ही मूलधन के भुगतान पर एक साल की मोहलत भी दी गई थी, जिससे व्यवसायों को संभलने का समय मिल सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार पिछली योजना के तहत बड़ी संख्या में गारंटी जारी की गई थी, जिसमें अधिकांश लाभ छोटे और मझोले उद्योगों को मिला। यही कारण है कि सरकार अब इसे और बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम कर रही है।