काबुल से बग़दाद तक, अमेरिका का ‘Regime Change’ मॉडल कितना कारगर?

By अभिनय आकाश | Jan 05, 2026

नए साल को शुरू हुए दो दिन नहीं बीते थे कि ऊर्जा पर नियंत्रण को लेकर दादागिरी के खेल की शुरुआत हो गई। एक आजाद देश के राष्ट्रपति को उसकी पत्नी के साथ उसके बेडरूम से जानवरों की तरह घसीट कर निकालना। इसके बाद बेशर्मी से उसकी परेड करवाना। कहीं आंखों में पट्टी बांधकर घुमाना, कहीं हाथों में हथकड़ी डालकर घुमाना। यह मंजर आज दुनिया को बता रहा है कि अगर आप कमजोर हैं तो चाहे आपके पास कितना तेल हो, जनता का वोट हो, पैसा हो, तुम्हारी कोई औकात नहीं है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ना खाता ना वही जो अमेरिका के हित में है वही सही। और उसने दुनिया को आज यह भी स्पष्ट कर दिया कि नियम, कायदे, कानून जो है वह सिर्फ कमजोर देशों के लिए अमेरिका के लिए नहीं है। यूएन जो है वह सिर्फ कागजों तक सीमित है। लोकतांत्रिक बातें वहीं तक अच्छी हैं जहां पर अमेरिका का भला हो।

2020 में कैसे फेल हुआ था अमेरिका का ऑपरेशन गिदोन

एक ऑपरेशन 2020 में भी हुआ था। ऑपरेशन गिदोन इसका नाम था। तब अमेरिका ने भाड़े के सैनिकों को समुद्र के रास्ते वेनेजुला भेजा था। उसका प्लान था कि माधुरों को किडनैप करके अमेरिका ले आओ। लेकिन उस वक्त वेनेजुला के मछुआरों और स्थानीय पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उस वक्त अमेरिका की बेज्जती हुई थी। तब माधुरों की सेना और जासूस वफादार थे। इसलिए इस बार सीआईए और ट्रंप ने रणनीति बदली और कहा बाहर युद्ध लड़ने में सरदर्द है। अंदर वाले खरीद लो। पैसों का इस्तेमाल करो सब बिक जाएंगे। और वही हुआ। डोनाल्ड ट्रंप ने 18 दिसंबर 2025 को खुलेआम यह कहा था कि वेनेजुला का तेल हमारा था। उन्होंने हमारी कंपनियों को निकाला। तेल पर अधिकार जमा लिया।

लोकतंत्र बचाने या डॉलर को वेंटिलेटर से हटाने की कहानी

वेनेजुला के पास इस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। सऊदी अरब से भी ज्यादा। साल 2025 में डॉलर की कीमत गिर चुकी है। दुनिया के कई देश डॉलर छोड़कर अपनी करेंसी में व्यापार कर रहे हैं। अब अगर इसमें वेनेजुला भी अपना इतना बड़ा तेल का भंडार डॉलर के बजाय किसी और करेंसी में बेचता। चाहे वो चीनी, युवान, क्रिप्टो या फिर जो खबरें आ रही थी कि अलग-अलग दुनिया में संगठन जैसे ब्रिक्स हैं वो एक प्लान कर रहे थे तो फिर अमेरिकी डॉलर की बादशाहत खतरे में पड़ जाती। इसीलिए कहानी माधुरों को हटाना या लोकतंत्र बचाने की नहीं थी। यह अमेरिका के डॉलर को वेंटिलेटर से हटाने की थी।

इराक में जैविक हथियार के नाम पर सद्दाम पर हमला

2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला कर राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार गिरा दी। तब जॉर्ज डब्ल्यू बुश सरकार ने दावा किया कि इराक के पास रासायनिक और जैविक हथियार हैं और वह परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू कर रहा है। इसी आधार पर युद्ध शुरू हुआ। 2004 में अमेरिकी सरकार के ही इराक सर्वे ग्रुप ने माना कि इराक के पास कोई सक्रिय जैविक हथियार नहीं थे। आज इराक अस्थिरता और हिंसा से जूझ रहा है।

लीबिया में  नागरिक सुरक्षा के आरोप में हमला

2011 में अमेरिका और नाटो ने लीबिया में सैन्य हस्तक्षेप किया। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा और लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी थे। अमेरिका ने कहा कि यह हमला नागरिकों की रक्षा और कथित नरसंहार रोकने के लिए जरूरी है। लेकिन 2016 में ब्रिटेन की संसद की विदेश मामलों की समिति ने रिपोर्ट में कहा कि लीबिया पर हमला गलत खुफिया जानकारी पर आधारित था। आज लीबिया गृहयुद्ध से जूझ रहा है।

सीरिया में असद का तख्तापलट

2017 में अमेरिका ने सीरिया के शायरत एयरवेस पर टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया। तब अमेरिका में ट्रम्प और सीरिया में बशर अल-असद राष्ट्रपति थे। अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई रासायनिक हमले के जवाब में की गई। लेकिन अमेरिका का दावा पूरी तरह साबित नहीं हुआ। बाद में अमेरिकी ने असद विरोधी एचटीएस को समर्थन दिया और दिसंबर 2024 में असद का तख्तापलट हुआ। सीरिया आज अस्थिरता झेल रहा है।

अफगानिस्तानः  20 साल बाद देश को बदहाल छोड़ लौटे अमेरिकी सैनिक

2001 में 9/11 हमल के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया। तब अमेरिका में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था। अमेरिका ने कहा कि लक्ष्य अल-कायदा को खत्म करना और आतंकवाद रोकना हैयह तर्क सीधे झूठा नहीं निकला, लेकिन 2021 में तालिबान की वापसी ने 20 साल की अमेरिकी रणनीति को असफल साबित कर दियादेश आज भी तालिबान शासन में है और मानवीय संकट झेल रहा है

इमरान ने साइफर विवाद में अमेरिका को घेरा था

10 अप्रैल 2022 को पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव में हारने के बाद सत्ता से हटना पड़ाउन्होंने अमेरिका पर साजिश का आरोप लगाया और कहा कि 7 मार्च 2022 को आए एक राजनयिक साइफर में अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने धमकी भरा संदेश दियाइमरान ने कहा, स्वतंत्र विदेश नीति के कारण अमेरिका ने सरकार गिरवाई

बांग्लादेशः सेंट मार्टिन के लिए तख्तापलट का आरोप

5 अगस्त 2024 को विरोध प्रदर्शनों के बीच बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने इस्तीफा देकर देश छोड़ दियाबाद में उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप पर सैन्य एयरबेस चाहता थाउनके इनकार करने पर आंदोलन को समर्थन मिलाइसके बाद अमेरिका से लौटकर मोहम्मद युनूस ने अंतरिम सरकार में पीएम पद संभाला

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