By नीरज कुमार दुबे | May 29, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों, व्यापारिक वार्ताओं, सीमा मामलों, ऊर्जा सुरक्षा तथा वैश्विक घटनाक्रमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत जानकारी दी।
भारत-चीन सीमा मामलों पर आयोजित कार्य तंत्र की 35वीं बैठक का उल्लेख करते हुए जायसवाल ने कहा कि बीजिंग में हुई बैठक रचनात्मक रही और इसे आगे की प्रगति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है। दोनों पक्षों ने सीमा प्रबंधन, सीमांकन, संस्थागत व्यवस्था तथा सीमा सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ स्तर की अगली बैठक जल्द आयोजित करने पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं में हुए समझौतों को आगे बढ़ाने तथा अगली बैठक की तैयारी के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में प्रवक्ता ने कहा कि भारत पहले ही अपना आधिकारिक रुख सार्वजनिक कर चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय और भारत-चीन सीमा मामलों से जुड़े कार्य तंत्र की बैठक को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए। कश्मीर के प्रश्न पर भी उन्होंने कहा कि भारत अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर चुका है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के मॉस्को में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर आतंकवाद का मुकाबला करना चाहिए तथा उन देशों को भी चिन्हित करना चाहिए जो आतंकवाद को समर्थन देते हैं या अपनी भूमि का उपयोग ऐसी गतिविधियों के लिए होने देते हैं।
खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय ध्वज वाले 11 पोत अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि वहां मौजूद 14 पोत हार्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान संबंधी प्रभासाक्षी के प्रश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत और इजराइल के बीच संबंध मजबूत, अच्छे और सौहार्दपूर्ण हैं। वहीं क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वॉड किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के हित में साझा परियोजनाओं और पहलों को आगे बढ़ाने का मंच है। उन्होंने कहा कि क्वॉड के तहत जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। क्वॉड का उद्देश्य चारों सदस्य देशों के नागरिकों के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य साझेदार देशों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। जायसवाल ने कहा कि क्वॉड का एजेंडा व्यापक है और इसका मुख्य लक्ष्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करते हुए जनकल्याण को बढ़ावा देना है।
बांग्लादेशी नागरिकों के सत्यापन और निर्वासन के मुद्दे पर प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने 2,680 से अधिक मामलों को बांग्लादेश के समक्ष सत्यापन के लिए भेजा है। नागरिकता की पुष्टि होने के बाद इन लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में सत्यापन पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित है और भारत को बांग्लादेश से शीघ्र प्रतिक्रिया की उम्मीद है।
नेपाल के साथ संबंधों पर उन्होंने बताया कि विदेश सचिव को उनके नेपाली समकक्ष की ओर से आमंत्रण प्राप्त हुआ है और पारस्परिक सहमति बनते ही उनकी नेपाल यात्रा आयोजित की जाएगी। अमेरिका में भारतीय दंपति के साथ नस्लीय भेदभाव की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें अस्वीकार्य हैं।
मुक्त व्यापार समझौतों से जुड़े प्रश्नों पर जायसवाल ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समूह के साथ वार्ताएं जारी हैं। वहीं कनाडा के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं और दोनों पक्ष इसे जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रयासरत हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि अप्रैल में अमेरिका का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था और अगले सप्ताह एक और प्रतिनिधिमंडल आने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के विषय में प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दुनिया भर में स्रोतों का विविधीकरण कर रहा है। नॉर्वे से गैस की पहली खेप के भारत पहुंचने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया साइप्रस यात्रा के दौरान उन्होंने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भाग लिया और यूक्रेन सहित कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों पर चर्चा की।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बोलीविया की स्थिति पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र को चिकित्सा सामग्री की पहली खेप भेज दी है। यह सामग्री युगांडा में भारत के उच्चायुक्त द्वारा सौंपी गई और भारत भविष्य में भी इस जनस्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में अफ्रीकी देशों की सहायता करता रहेगा।
कुल मिलाकर, साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग, व्यापारिक साझेदारियों के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा तथा मानवीय सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।