'Vedas से उपनिषद तक...', Shikshapatri महोत्सव में PM Modi ने याद दिलाई भारत की ज्ञान परंपरा

By अंकित सिंह | Jan 23, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो संदेश के माध्यम से शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव को संबोधित किया। यह महोत्सव भगवान स्वामीनारायण की शिक्षापत्री की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। उन्होंने इस द्विशताब्दी को राष्ट्र के लिए गौरव और आध्यात्मिक महत्व का क्षण बताया। भारत की सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश हमेशा से ज्ञान के मार्ग पर चला है और वेद हजारों वर्षों बाद भी मानवता को प्रेरित करते आ रहे हैं। 

 

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मोदी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा समय के साथ उपनिषदों, पुराणों और अन्य मौखिक एवं लिखित माध्यमों से विकसित हुई है, जिसे संतों और ऋषियों ने विभिन्न युगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान स्वामीनारायण का जीवन जनशिक्षा और सेवा में गहराई से समाहित था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षापत्री धार्मिक जीवन के लिए सरल लेकिन गहन मार्गदर्शन प्रदान करती है और आज भी रोजमर्रा के जीवन में प्रासंगिक बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान स्वामीनारायण का जीवन आध्यात्मिक साधना और सेवा दोनों का प्रतीक था और कहा कि उनके अनुयायी आज समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए समर्पित पहलों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।


प्रधानमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, किसान कल्याण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में स्वामीनारायण परंपरा के योगदान की प्रशंसा करते हुए इन प्रयासों को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि द्विशताब्दी समारोह शिक्षापत्री की शिक्षाओं पर चिंतन करने और समकालीन समय में इसके आदर्शों का पालन कैसे किया जा रहा है, इसका आकलन करने का अवसर प्रदान करते हैं। आध्यात्मिक मूल्यों को राष्ट्रीय आंदोलनों से जोड़ते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वदेशी, स्वच्छता और "वोकल फॉर लोकल" जैसे अभियान पूरे देश में गूंज रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलों को शिक्षापत्री द्विशताब्दी के साथ जोड़ने से समारोह और भी अधिक सार्थक हो जाएंगे।

 

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प्रधानमंत्री ने भारत के प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण के लिए शुरू किए गए ज्ञान भारतम मिशन में अधिक भागीदारी का आग्रह किया। उन्होंने प्रबुद्ध संगठनों और आध्यात्मिक संस्थानों से राष्ट्र की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों की रक्षा में सहयोग करने का आह्वान किया और कहा कि यह विरासत भारत की पहचान का अभिन्न अंग है। पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भी जिक्र किया और कहा कि यह सोमनाथ मंदिर के पहले विध्वंस से लेकर आज तक की एक हजार साल की यात्रा का स्मरणोत्सव है। उन्होंने लोगों से समारोह में शामिल होने और इसके महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने की अपील की।

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