मानवता का कल्याण और सुख, सदैव सुनिश्चित किये जाने को लेकर दो कदम और आगे बढ़े जी 20 के देश

By कमलेश पांडे | Sep 09, 2023

नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बन गई है। कुल 37 पेज के नई दिल्ली घोषणा पत्र से 125 देशों ने सहमति जताई है, जिससे बहुत सारी बातें स्पष्ट हो चुकी हैं। इसका आशय स्पष्ट है कि मानवता का कल्याण और सुख, सदैव सुनिश्चित किये जाने सम्बन्धी पीएम मोदी के आह्वान पर जी 20 के देश दो कदम और आगे बढ़ चुके हैं, जो पूरी दुनिया के लिए राहत और खुशी की बात है। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बताया कि "हमारे टीम के हार्ड वर्क से और आप सभी के सहयोग से नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बन गई है।" इससे साफ है कि कूटनीति के मोर्चे पर भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। सच कहा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व गुरु के अलावा विश्व मित्र की भारत की नई छवि स्थापित करने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है।


जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वन अर्थ वन फैमिली' पर प्रमुखता से बात की और मानव केंद्रित विकास की बात करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा से इसे बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम शुरू करने से पहले मोरक्को में आए विनाशकारी भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा, “कार्यक्रम शुरू करने से पहले मैं कुछ देर पहले मोरक्को में आए भूकंप के प्रभावित लोगों के लिए संवेदना प्रकट करना चाहता हूं। मैं ये कहना चाहता हूं कि पूरा विश्व उनके साथ है और हम उन्हें हरसंभव मदद देने को तैयार हैं।”

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अपने उद्घाटन भाषण के दौरान मोदी ने कहा, “जहां हम एकत्र हुए हैं, वहां से कुछ दूर ढाई हज़ार साल पुराना स्तंभ है जिस पर प्राकृत भाषा में लिखा है- मानवता का कल्याण और सुख, सदैव सुनिश्चित किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, "दुनिया इस समय कई संकटों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध और जलवायु परिवर्तन विश्व के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर भरोसा बहाल करने का समय आ गया है।" उन्होंने आगे कहा, “भारत पूरी दुनिया से अपील कर रहा है कि हम मिलकर ग्लोबल ट्रस्ट डेफिसिट को विश्वास, भरोसे में बदलें। ये सभी के साथ मिलकर चलने का वक्त है। हम सभी के लिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास हमारे लिए पथप्रदर्शक बन सकता है।”


मोदी ने अपनी बात पर बल देते हुए कहा कि, “हमें आने वाली पीढ़ी के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल, नॉर्थ और साउथ के बीच का फर्क, ईस्ट और वेस्ट के बीच का फर्क, अनाज संकट, खाद संकट जैसी चुनौतियों को नहीं दे सकते। यदि आज हमलोग नहीं सम्भले तो निकट भविष्य में इसका सामना करना ही पड़ेगा।”


वहीं, दिल्ली में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में अफ़्रीकन यूनियन यानी अफ़्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के तौर पर जी-20 में शामिल कर लिया गया है, इस बात की जानकारी देते हुए मोदी ने कहा कि, “सबका साथ की भावना से ही भारत ने अफ़्रीकन यूनियन को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने की बात की थी। आप सबकी सहमति से मैं अफ्रीकन यूनियन के अध्यक्ष को जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में अपना स्थान ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करता हूं।”


वहीं, बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जी 20 बैठक में एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य पर जोर दिया गया है। पहली बार अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्यता दी गई है। भारत की हरित विकास पहल को मंजूरी दी गई है। संतुलित, समावेशी, मजबूत और स्थायी विकास पर जोर दिया गया है। बहुपक्षीय व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर बल दिया गया है। सभी देश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करेंगे। साथ ही सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर जोर देंगे। इसके अलावा भी उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बातें कही है।


वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जी 20 बैठक में भारत की अध्यक्षता में कई समाधान मिले हैं। वैश्विक समस्याओं के निराकरण पर जोर देते हुए उनके समुचित समाधान पर फोकस किया गया है। मजबूत टिकाऊ और समावेशी विकास पर मुहर लगी है। 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा हुई। विकासशील देशों पर ध्यान देने की प्रतिबद्धता जताई गई, ताकि कोई भी देश पीछे ना छूटे। ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर बात हुई। बायो फ्यूल एलायंस बनाया जाएगा। क्रिप्टो पर पालिसी को लेकर भी चर्चा हुई। हमें चुनौती पूर्ण समय में अध्यक्षता मिली। निजी डेटा की सुरक्षा पर भी बात हुई। इसके अलावा भी उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बातें कही है।


वहीं, जी 20 के शेरपा अमिताभ कांत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बैठक में यह तय हुआ कि किसी देश की अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। परमाणु हथियारों का इश्तेमाल या धमकी स्वीकार्य नहीं होगा। सभी देशों को यूएन चार्टर के मुताबिक काम करना चाहिए। किसी भी देश की अखंडता के खिलाफ धमकी, बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबने माना कि आज का युग युद्ध का नहीं है। आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई है। किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है। आतंकी समूहों के खिलाफ सहयोग देने पर सहमति बनी। इसके अलावा भी उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बातें कही है।


इस घोषणा पत्र में वैश्विक आतंकवाद का 9 बार और यूक्रेन का 4 बार जिक्र आया है, लेकिन यूक्रेन के सम्बंध में रूस का जिक्र नहीं किया गया है। यह बुलन्द भारत की दबंग तस्वीर को अभिव्यक्त करता है। आखिर जी 20 के देशों ने माना है कि परस्पर अब और अधिक अविश्वास नहीं किया जा सकता है, क्योंकि भारत के शांति और विकास के मंत्र से सबकी आस जगी है।


बता दें कि 09 सितंबर शनिवार को जब जी20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई तो सुबह साढ़े दस से दोपहर डेढ़ बजे तक पहला सत्र 'वन अर्थ' पर आयोजित किया गया। वहीं, 'वन फैमिली' पर दूसरा सत्र दोपहर 3 बजे से 4.45 बजे तक चला। वहीं शाम 7 बजे डिनर पर सभी राष्ट्राध्यक्ष ने पारस्परिक मुलाक़ात किया और रात 8 बजे से 9.15 बजे तक बातचीत हुई। वहीं रविवार को जी20 सम्मेलन के आखिरी दिन 'वन फ़्यूचर' पर तीसरा सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के बाद जी20 शिखर सम्मेलन समाप्त हो जाएगा।


जी20 ग्रुप में 19 देश शामिल हैं- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ़्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका। ग्रुप का 20वां सदस्य यूरोपीय संघ है। अफ़्रीकी यूनियन के इस संगठन में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने के बाद अब 19 देश और दो संघ इसके सदस्य हो गए हैं। 


# मोदी ने बारी-बारी किया विश्व नेताओं का स्वागत, उनकी बॉडी लैंग्वेज ने सबको दिया समुचित संदेश 


शनिवार को सबेरे जी-20 सम्मेलन के लिए सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद प्रगति मैदान पहुंच गए थे। यहां पर बने भारत मंडपम में उन्होंने एक एक कर सभी विदेशी नेताओं का स्वागत किया। खास बात यह कि स्वागत कार्यक्रम के लिए जो मंच तैयार किया गया है, उसके पीछे कोणार्क चक्र की प्रतिकृति लगाई गई है। बता दें कि कोणार्क चक्र पहली बार 13वीं सदी में राजा नरसिंहदेव प्रथम के शासन काल में बनाया गया था। ये चक्र भारत के प्राचीन ज्ञान, यहां की सभ्यता और स्थापत्य कला को दर्शाता है। माना जाता है कि कोणार्क चक्र के घूमने की तुलना कालचक्र से की जाती है और इसे आगे बढ़ने और बदलाव के रूप में देखा जाता है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत विश्व के कई नेताओं का भारत मंडपम में स्वागत किया। पीएम मोदी ने जब राष्ट्रपति बाइडेन का स्वागत किया तो उनके पीछे दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कोणार्क मंदिर की तस्वीर स्पष्ट नज़र आ रही थी। मोदी ने कोणार्क चक्र के बारे में जो बाइडन को जानकारी भी दी। वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी मोदी से गले लगकर मिले और उनसे खुलकर संक्षिप्त बातचीत की। सुनक के अलावा मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद का भी स्वागत किया। पीएम मोदी ने नीदरलैंड्स के पीएम मार्क रुथ और नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद तिनुबु का स्वागत किया। इनके साथ ही सिंगापुर के पीएम ली सीन लूंग और स्पेन की उपराष्ट्रपति का भी भारत मंडपम में स्वागत किया। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज का भी पीएम मोदी ने स्वागत किया। उन्होंने आईएमएफ की चीफ, विश्व बैंक के प्रमुख, मिस्त्र के पीएम, मॉरीशस के पीएम, स्पेन की पीएम, नीदरलैंड के पीएम समेत कई शीर्ष नेताओं का स्वागत किया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा कि कोविड-19 के बाद विश्व में एक बहुत बड़ा संकट विश्वास के आभाव का आया है। युद्ध ने इसको और गहरा किया है। जब हम कोविड को हरा सकते हैं तो हम आपसी विश्वास में आए इस संकट पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह हम सबका साथ चलने का समय है इसलिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मंत्र हम सबके लिए पथ प्रदर्शक बन सकता है। वैश्विव अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल हो, उत्तर और दक्षिण में डिवाइड हो, पूर्व और पश्चिम की दूरी हो, भोजन, ईंधन और उर्वरक का प्रबंधन हो, आतंकवाद साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा या जल सुरक्षा, हमें भावी पीढ़ियों के लिए इसका ठोस समाधान ढूंढना होगा।


- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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